‘मुझे किसी की जरूरत नहीं’ – क्या यह आत्मनिर्भरता है या पुराने जख्मों का असर?

क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो हर काम अकेले करना पसंद करते हैं? ‘हाइपर-इंडिपेंडेंस’ या जरूरत से ज्यादा आत्मनिर्भर होना, ऊपर से देखने में एक बहुत बड़ी खूबी लगती है। इसका सीधा मतलब है कि आप अपने काम पूरे करने के लिए किसी का इंतजार नहीं करते हैं।
हालांकि, क्या आपने कभी सोचा है कि यह आदत आखिर शुरू कहां से होती है और कैसे कई बार परेशानी का सबब भी बन जाती है? आइए, साइकोलॉजिस्ट डॉ. ललिता सुगलानी के इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए समझते हैं।
क्यों कुछ लोग किसी की मदद लेना पसंद नहीं करते?
कई लोगों के लिए, हर काम अकेले करने की यह आदत उन पुराने अनुभवों का नतीजा होती है, जहां दूसरों पर भरोसा करना सुरक्षित नहीं लगा था। शायद उन्हें तब मदद नहीं मिली जब उन्हें जरूरत थी, या जब उन्होंने अपना दुख साझा किया तो उन्हें निराशा हाथ लगी। ऐसे अनुभवों के कारण इंसान यह मान लेता है कि किसी और पर निर्भर होने से बेहतर है कि सब कुछ खुद ही संभाल लिया जाए।
ताकत जब कमजोरी बन जाए
आत्मनिर्भर होने में कोई बुराई नहीं है, यह एक लाइफ स्किल है, लेकिन समस्या तब आती है जब आपकी यह ताकत आपके लिए एक रुकावट बन जाती है। यह तब होता है जब अकेले काम करने की आदत आपको दूसरों से जुड़ने से रोकने लगती है। धीरे-धीरे, “मुझे किसी की जरूरत नहीं है” वाली सोच चुपचाप इसमें बदल जाती है कि “मुझे नहीं पता कि लोगों को अपने करीब कैसे आने दिया जाए।” तब आपकी आजादी आपको ताकत देने के बजाय आपको अकेला कर देती है।
खुद से सवाल पूछना है जरूरी
यह पता लगाना बहुत जरूरी है कि आपके लिए वह सीमा कहां है। खुद से पूछिए कि क्या आपकी यह आजादी वाकई आपको सहारा दे रही है, या यह आपको किसी ऐसी चीज से बचा रही है जिस पर आपने अभी तक गौर नहीं किया है? यह सोचना भी जरूरी है कि अगर आप थोड़ी-सी मदद स्वीकार कर लें, तो क्या सच में आप कमजोर हो जाएंगे?
समझदारी ही बदलाव की पहली सीढ़ी
हाइपर-इंडिपेंडेंस कोई ऐसी चीज नहीं है जिसके लिए खुद को दोषी माना जाए या जज किया जाए। असल में, यह बस समझने की चीज है। जब हम अपनी इन आदतों पर ध्यान देते हैं और यह समझते हैं कि हम ऐसा बारताव क्यों कर रहे हैं, तो हम खुद को गहराई से जान पाते हैं। इससे हमें यह समझने में मदद मिलती है कि प्यार वास्तव में क्या है और हम दूसरों के साथ कैसे एक सच्चा और गहरा रिश्ता बना सकते हैं।





