माता-पिता को बच्चों को सिखानी चाहिए कुछ ऐसी आदतें

आज की जीवन शैली या लाइफ स्टाइल इतनी ज्यादा व्यस्त हो गई है कि हम कई बार अपने बच्चों की तरफ ध्यान ही नहीं दे पाते। बढ़ती महंगाई और प्रतिस्पर्धा के साथ ही अपनी व्यावसायिक प्रतिबद्धता के चलते जाने-अनजाने में ही हम अपने बच्चों से कब दूर चले जाते हैं, इसका हमें अनुमान ही नहीं हो पाता। जब परिणाम सामने आता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। हमारे बच्चे हमसे बहुत दूर चले जाते हैं और हमारे नियंत्रण या हमारी पहुंच से बाहर हो जाते हैं। ऐसे में यह बहुत जरूरी हो गया है कि चाहे हम अपनी रोजाना की जिंदगी में कितने ही व्यस्त क्यों न हों लेकिन बच्चों के प्रति कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर और उन्हें अपना कर हम अपने बच्चों के लिए एक आदर्श माता-पिता बन सकते हैं, उनके अच्छे दोस्त बन सकते हैं। जीवनशैली वार्ता में इसी पर विस्तार से चर्चा कर रहे हैं नवीन कुमार घोषाल –
बच्चे अपने माता–पिता को देखकर ही सब कुछ सीखते है जैसे आदतें, तौर–तरीके, बोलचाल इत्यादि। जैसे–जैसे बच्चे बढ़ते हैं, वह अपने माता–पिता के व्यवहार और कार्यों का अनुकरण करते हैं, बच्चों के लिए उनके माता–पिता आदर्श होते हैं। उनकी बुद्धिमत्ता और आदतें भी बच्चों में जाती है हैं। बच्चों के लिए उनके माता–पिता हमेशा उनके उदहारण होते हैं, कभी–कभी मुसीबत पड़ने पर वो उनके द्वारा बताए गए मार्गदर्शन का पालन भी करते हैं और बच्चों को छोटी उम्र से ही यह आदत पड़ जाती है। इसलिए, बच्चों को अच्छी और बुरी आदतों के बीच का अंतर समझाना और अच्छी आदतों को अपनाने के लिए कहना जरूरी होता है। यह अच्छी आदतें होना आवश्यक है बच्चों को सही शिष्टाचार और अच्छी आदतें सिखाना मुश्किल कार्य महसूस हो सकता है। लेकिन आप धैर्य रखें और उन्हें सही रास्ते की ओर ले जाएं। नीचे वर्णित बातें अच्छी आदतें मानी जाती हैं जो बच्चों में होनी चाहिएं-
स्वस्थ खान–पान
सुझाव: भोजन को रंग–बिरंगा बनाएं।
माता–पिता को नियमित रूप से पौष्टिक और संतुलित भोजन करके बच्चों के लिए अच्छी मिसाल पेश करनी चाहिए। बच्चे ज्यादातर फास्ट फूड, चिप्स, मिठाई, बिस्कुट, और चॉकलेट की मांग करते हैं। आपको उन्हें यह विश्वास दिलाना होगा कि घर का बना स्वस्थ भोजन भी उतना ही स्वादिष्ट हो सकता है। उन्हें नूडल्स, पास्ता, केक, कुकीज और पिज्जा घर पर बना कर खिलाएं। या फिर इनसे मिलते-जुलते अपने देसी व्यंजन तैयार करें। इसमें अपने बजट का भी ध्यान रखें, यह जरूरी नहीं कि बाजार से महंगी सामग्री ही खरीदी जाए। खोजने में आएंगे तो कई सस्ते और सेहत के लिए गुणकारी सामग्री बाजार में मिल जाएंगे। आपको बस कुछ होमवर्क करना पड़ेगा। इन सामग्रियों के चयन में घर के बड़े बच्चों को भी शामिल कर सकते हैं। बच्चों में उनके हमउम्र अथवा कुछ बड़े बच्चों की बात का अधिक असर पड़ता है। अगर किसी बच्चे को फास्ट फूड के अलावा का घर का व्यंजन पसंद नहीं आता तो आप वैसी सी घरेलू सामग्री का व्यंजन तैयार कर उसके किसी दोस्त को आमंत्रित कर सकते हैं, ताकि वह अपने दोस्त यानी आपके बच्चे को बता सके कि वह व्यंजन कितना स्वादिस्ट और सेहतपूर्ण है। बच्चों में स्वस्थ खान–पान की आदत को विकसित करने के लिए, रंग–बिरंगे व्यंजन बनाएं। दिनचर्या निर्धारित कर दें कि हफ्ते के अलग-अलग दिन इंद्रधनुष के रंगों में से किसी एक रंग का खाना उन्हें खाना पड़ेगा। इस तरह वह हर बार भोजन में विभिन्न रंगों से बना खाना खाएंगे, रंग का मतलब यह नहीं कि आप उस में कोई रासायनिक रंग डाल कर रंगीन बनाएं। बल्कि उसके इनग्रिडिएंट्स (भोजन की सामग्री) उस कलर का इस्तेमाल करें। इससे न केवल स्वास्थ्य लाभ होता है, बल्कि बच्चों को इसे खाने में मज़ा भी आएगा।
शारीरिक श्रम वाले काम
सुझाव: बच्चों को बैठने के लिए प्रोत्साहित न करें, उन्हें चलने-फिरने दें।
अपने बच्चों को बैठे रहने और सोफा पर आराम करने और टेलीविजन देखने की अनुमति देना, माता–पिता के रूप में आपकी ओर से एक बड़ी गलती होगी। अपने बच्चों को जड़वत एक ही स्थान पर बैठने की जीवन शैली न अपनाने दें। उन्हें घर से बाहर निकलने के लिए प्रोत्साहित करें, चाहे टहलने या व्यायाम करने या बाहर जा कर खेलने के लिए। आजकल कोरोना काल है, इसमें बाहर जाने से बच रहे हैं तो घर में ही एक कमरे से दूसरे कमरे में अथवा बाहर आंगन में घूमने को प्रेरित करें। कोई हल्के वजन की किताब या कापी चलते-फिरते भी पढ़ी जा सकती है। आप पारिवारिक कार्यक्रम का आयोजन इस तरह से आयोजित करें कि वह कुछ मज़ेदार बन जाए और अपने बच्चों को इसमें स्वयं ही शामिल हो जाएं। अपने बच्चों को समझाएं कि पूरे समय एक ही स्थान पर बैठे रह कर टीवी देखते रहने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। स्थानबद्ध जीवन शैली के कारण जो स्वास्थ्य संबंधी खतरे हो सकते हैं, वह हैं : मोटापा, नींद न आना, ध्यान संबंधी विकार और भावनात्मक और सामाजिक समस्याएं ।
पोषक–तत्व की मात्रा के लेबल पर ध्यान दे
सुझाव: बजार खरीदे जाने वाले डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों का लेबल पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें।
इस दौर में बाजार से कई खाद्य पदार्थ डिब्बा बंद आते हैं। इस सामग्री को खरदीदते समय उनकी पैकिंग तारीख, एक्सपायरी तारीख, उसमें शामिल किए गए पदार्थों की लिस्ट अवश्य पढ़नी होती है। इसी की आदत बच्चों में डालनी चाहिए।
परिवार के सभी सदस्यों के साथ भोजन का आनंद लें
सुझाव: साथ में डिनर के समय का आनंद लेना अपनी प्राथमिकता बनाएं।
आज हमारा जीवन जितना व्यस्त रहता है, उसमें परिवार और बड़ों के साथ मूल्यवान समय बिताने के लिए शायद ही किसी के पास फुरसत रहती है। एक व्यस्त कार्य जीवन के कारण हो सकता है कि आप बच्चों के साथ बैठकर उनकी कहानियों और व्यक्तिगत मुद्दों को सुनने का समय न निकाल सकें। अपने परिवार के सदस्यों के साथ डिनर के समय का आनंद लेना को अपनी प्राथमिकता बनाएं। आप कई चीजों पर चर्चा कर सकते हैं और एक दूसरे के साथ अपने विचार साझा कर सकते हैं; इससे आपके बच्चों पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। एक साथ बैठ कर खाने के अन्य लाभों में निम्नलिखित शामिल हैं : बच्चे सहज होने लगते हैं और परिवार में अच्छा तालमेल रहता है, बच्चे खान–पान की अच्छी आदतें विकसित करते हैं और बड़ों के साथ खाते समय जंक फूड खाने से बचते हैं और लोगों के बीच संबंध मजबूत होते हैं।
स्वस्थ हाइड्रेशन
सुझाव: पानी पिएं, सोडा नहीं।
छोटे बच्चों द्वारा बड़ों का अनुकरण करते हुए शीतल पेय पीना आमतौर पर देखा जाता है। आपको अपने बच्चों का मार्गदर्शन करना चाहिए और सादा पानी पीने और सोडा से बचने के महत्व को सुदृढ़ करना चाहिए। बस बच्चों को बताएं कि पानी स्वास्थ के लिए अच्छा होता है और यह कई बीमारियों से छुटकारा पाने में मदद करता है; जबकि शीतल पेय अस्वास्थ्यकर होते है, क्योंकि उनमें बहुत अधिक मात्रा में चीनी होती है जो कैलोरी को बढ़ाते हैं, जिससे वजन बढ़ता है। उन्हें शिक्षित करें कि पानी एक महत्वपूर्ण संसाधन है, और उचित हाइड्रेशन स्तर बनाए रखने के लिए पानी ज़्यादा मात्रा में पीना चाहिए। जब आपके बच्चे समझेंगे कि उनके शरीर के लिए पानी कितना महत्वपूर्ण है, तो वे नुकसानदायक पेय के बजाए पानी को चुनेंगे।
अपनी चीजें व्यवस्थित करना
सुझाव: अपने बढ़ते बच्चों के लिए एक साफ सुथरा व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराएं।
बच्चों को बचपन से ही स्वच्छता जरूर सिखाई जानी चाहिए। बच्चों के आसपास चीजों को ठीक से व्यवस्थित करके स्वच्छता सिखाना शुरू करें। जब वे चीजों को व्यवस्थित देखने के आदी हो जाएंगे, तो वे उन्हें भी उसी तरह रखना चाहेंगे। जब वे थोड़े बड़े हो जाए, तो आप उनकी सहायता कर सकते हैं और गंदगी को साफ करने और उन्हें सही तरीके से व्यवस्तित करने के लिए समय निर्धारित करें। नियमित रूप से ऐसा करने से, वह जल्द ही सीख जाएंगे और अपनी चीजों को स्वयं व्यवस्थित करने का प्रयास करेंगे।
पैसे को लेकर ज़िम्मेदार बनाएं
सुझाव: उनके लिए बजट निर्धारित करें।
जैसे ही आपके बच्चे इतने ज़िम्मेदार बन जाएं कि वह जाकर सामान खरीदने के लिए रुपये–पैसे का उपयोग कर सकें, तब आप उन्हें कड़ी मेहनत की कमाई के मूल्य के बारे में शिक्षित करना शुरू करें। आप अपने बच्चों को पैसे बचाने की आदत डालने के लिए उन्हें कभी–कभी पॉकेट मनी दे सकते हैं या उनके साथ मिलकर गुल्लक में पैसे रख सकते हैं। बच्चों को निर्धारित राशि दें और उन्हें अपने खर्चों का प्रबंधन करने और पैसे बचाने के लिए प्रोत्साहित करें।
सार्वजनिक स्थानों को गंदा न करें
सुझाव: अपने कचरे को इकट्ठा करने के लिए एक प्लास्टिक बैग अपने साथ रखें; इसे कचरे के बैग को घर ले आएं और इसे अपने कूड़ेदान में फेंके।
अपने बच्चों को सभ्य और ज़िम्मेदार नागरिक बनना सिखाएं। उन्हें बताएं कि सार्वजनिक स्थान कूड़ा फेंकने के लिए नहीं हैं और कचरे को निकटतम कूड़ेदान में फेंकना चाहिए। उन्हें इस आसान आदत को विकसित करने में मदद करें, और उन्हें हर जगह इसका पालन करने के लिए कहें, क्योंकि यह उन्हें बेहतर व्यक्ति बनने में मदद करेगा। उन्हें गंदगी न फैलाने की आदत डालें, और आपके बच्चे आपकी मिसाल का अनुकरण जरूर करेंगे। हमेशा जब घर के बाहर हों तो चीजों को फेंकने के लिए डस्टबिन की तलाश करें। घर से बाहर कदम रखने से पहले आप अपने साथ एक छोटा सा प्लास्टिक बैग लें और उसमें अपना सारा कचरा इकट्ठा करें – खाली पानी की बोतलें, पेपर नैपकिन आदि।
विनम्र बने
सुझाव: लोगों के साथ वैसा ही व्यवहार करें जैसा आप चाहते हैं कि आपके बच्चे उनके साथ व्यवहार करें – सम्मान के साथ और विनम्रता से। विनम्र होना ऐसा गुण है जिसकी हर कोई प्रशंसा करता है। अपने बच्चों को लोगों का सम्मान करना सिखाएं, चाहे वे बुजुर्ग हों या उससे छोटे हों। उन्हें समझाएं कि भले ही वह किसी ऐसे व्यक्ति के सामने हो जो उन्हें पसंद नहीं है, तब भी उन्हें विनम्र और सभ्य तरीके से बात करनी चाहिए। उन्हें सभी के साथ शांत और सौहार्दपूर्ण व्यवहार करना चाहिए। ये गुण जीवन भर उनके साथ रहेंगे, और उन्हें हमेशा सम्मान की दृष्टि से देखा जाएगा। पहले अपने बच्चों के साथ सम्मान से पेश आना शुरू करें, और आप देखेंगे कि वह इस आदत को खुद ही सीख लेंगे। सेविका के साथ विनम्रता से पेश आएं। बच्चे जो देखते है वही करते है।
नियमित रूप से व्यायाम करें
सुझाव: अपने बच्चों का किसी खेल में दाखिला कराएं।
अपने और अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर टहलने, जॉगिंग करने, तैराकी, व्यायाम या घर पर योग करने जैसे शारीरिक कार्य को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। अंततः व्यायाम पूरे परिवार के लिए फायदेमंद साबित होगा। बच्चों की दिनचर्या में शुरू से ही इसे शामिल करना उन्हें सक्रिय, सेहतमंद और लचीला बनाए रखेगा। इससे आपके बच्चों के लिए एक स्वस्थ जीवन शैली स्थापित करने में मदद मिलेगी। संगीत सुनते हुए कसरत कर के उसमें जोश लाएं। ऐसा करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपने बच्चे को किसी खेल में दाखिला दिलाएं । यह उन्हें मूल्यवान जीवन के सबक भी सिखाएगा, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण है खिलाड़ी भाव।
ईमानदार रहें
सुझाव: अपने बच्चों से झूठ न बोलें। सफेद झूठ भी झूठ ही है। हमेशा ईमानदार रहने की कोशिश करें।
ईमानदारी एक बहुत ही महत्वपूर्ण गुण है और बचपन से ही बच्चों को इसकी आदत डालनी चाहिए। माता–पिता होने के नाते, आप अपने बच्चों के लिए रोल मॉडल हैं। आपके कार्यों और शब्दों का उन पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है, चाहें वह सकारात्मक हो या नकारात्मक। हर समय ईमानदार रहें, विशेष रूप से बच्चों की उपस्थिति में। उन्हें हर परिस्थिति में सच बोलने के लिए प्रेरित करें।
हाथ धोना
सुझाव: उन्हें गंदे हाथों के कारण होथों में लगे कीटाणुओं और उनसे होने वाली बीमारियों के बारे में सिखाएं।
छोटे बच्चों को भोजन से पहले और बाद में हाथ धोना सिखाया जाने वाला सबसे आम शिष्टाचार है। उन्हें बताएं कि हाथ धोने से आम बीमारियां जैसे फ्लू, सर्दी और अन्य संक्रमण से बचा जा सकता है। आपको उन्हें निम्नलिखित बुनियादी नियम सिखाने चाहिए: भोजन से पहले या बाद में या रेत में खेलने के बाद वह अपने हाथ धोएं। हाथों को सुखाने के लिए साफ सूखे तौलिये या टिशु का उपयोग करें। जीवाणुरोधी हैंड वॉश का उपयोग करें ।
रोज स्नान करना
सुझाव: ग्रीष्मकाल में दिन में दो बार स्नान करें।
स्नान एक बुनियादी जरूरत है और सभी उम्र के लोगों के लिए अनुशंसित है। सुबह उठने के बाद सबसे पहले इसे करना चाहिए। आप अपने बच्चों को गर्मियों के दिनों में दो बार नहला सकते हैं। नहीं तो, बच्चों को बाहर से खेल कर द घर आने के बाद स्नान करना चाहिए। स्नान करने से त्वचा फिर जीवंत हो उठती है और बच्चे तरोताज़ा महसूस करते हैं, साथ ही रात में अच्छी नींद भी आती है।
दूसरों की मदद करना
सुझाव: हर दिन किसी एक व्यक्ति की मदद करने के लिए बच्चों को प्रोत्साहित करें।
बच्चों में मदद करने की प्रकृति को बढ़ावा दें। उन्हें विनम्रता और उदारता का रास्ता दिखाएं। जब भी और जहां भी संभव हो, जरूरतमंद लोगों को मदद करने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करें। अपने बच्चों की मौजूदगी में अपने हिस्से का काम करें; लोगों की मदद करें, चाहे वह आपके दोस्त हों या अजनबी हो, लेकिन साथ ही, उन्हें अजनबियों से सतर्क रहने के लिए सावधान करें।
दोस्तों के साथ समय बिताना
सुझाव: सप्ताहांत पर प्ले–डेट्स का आयोजन करें।
ऐसा कहा जाता है कि स्कूल में की गई दोस्ती लंबे समय तक बनी रहती है, शायद जीवन भर के लिए भी। ऐसा इसलिए है क्योंकि बच्चे मासूम होते हैं; वे बिना किसी स्वार्थ के दोस्त बनाते हैं। और बचपन में दोस्त आपके बच्चों के सामाजिक विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बच्चे दोस्तों के साथ रहकर मूल्यवान जीवन कौशल जैसे बातचीत करना, सामाजिकता, सहयोग, समस्या को हल करना और टीम वर्क सीखते हैं।
किशोर और वयस्कता के दौरान, अच्छे दोस्त आपके बच्चों के सपोर्ट सिस्टम का हिस्सा बन जाते हैं। अपने बच्चों को दोस्त बनाने और उनके साथ मिलने–जुलने और समय व्यतीत करेंने के लिए प्रोत्साहित करें।
सुबह का नाश्ता जरूर करें
सुझाव: सुनिश्चित करें कि वे दिन की शुरुआत पौष्टिक, स्वस्थ भोजन से करें।
नाश्ता सभी उम्र के लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण भोजन है। यह छोटे बच्चों और स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए विशेष रूप से जरूरी है, क्योंकि यह मस्तिष्क, मेटाबॉलिज़्म और शरीर के कार्यों में तेज़ी लाता है और पूरे दिन ऊर्जा प्रदान करता है। आप अपने बच्चों को उनके नाश्ते में अधिक फाइबर वाले अनाज दे सकते हैं, क्योंकि इस तरह के खाद्य पदार्थ मधुमेह और हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं।
समय पर सोना
सुझाव: एक नियमित सोने के समय निर्धारित करें।
शिशु के साथ–साथ बढ़ते हुए बच्चे के लिए नींद बहुत महत्वपूर्ण है। आपको अपने बच्चों में बचपन से ही “जल्दी सोने और जल्दी उठने” की आदत डालनी चाहिए। स्कूल जाने वाले बच्चों को हर दिन सक्रिय और ऊर्जावान रहने की आवश्यकता होती है, जिसके लिए उन्हें पर्याप्त नींद की जरूरत होती है। नींद शरीर को दिन के दौरान खोई हुई सभी ऊर्जा को पुनःप्राप्त करने में मदद करती है। जल्दी सोने से आपके बच्चों को पर्याप्त आराम मिलेगा, जिससे बच्चे अगले दिन तरोताज़ा और स्फूर्तिमान महसूस करेंगे।
निष्पक्ष रहें
बच्चे निर्दोष और निष्पक्ष पैदा होते हैं, और भेद–भाव सामाजिक अनुबंधन का हिस्सा है। माता–पिता के रूप में, आपको बस अपने बच्चों को भेदभाव करने की प्रवृत्ति से दूर रखना होगा। उन्हें निष्पक्ष रहना और सभी लोगों के साथ समान व्यवहार करना सिखाएं, चाहे वह अमीर हो या गरीब, दोस्त हो या दुश्मन। आप उन्हें हर धर्म या जाति के बच्चों के साथ दोस्ती करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
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