‘महिलामय’ हो गईं यूपी की रोडवेज बसें, पुरुषों को खड़े होकर करना पड़ा सफर


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दो दिन मिलती मुफ्त यात्रा तो और बेहतर होता
भाई को राखी बांधने कर्वी से कानपुर जा रहीं मंजू गुप्ता ने महिलाओं की राखी यात्रा मुफ्त कर दिए जाने पर मुख्यमंत्री की सराहना की। साथ ही यह भी कहा कि मुफ्त यात्रा की अवधि कम से कम दो दिन होनी चाहिए थी। ताकि वापसी में भी इसका फायदा मिलता।
सौगात अच्छी, सीएम को थैंक्स
बांदा नरैनी की नीलम सोमवार को दोपहर बांदा डिपो की बस से कानपुर जा रहीं थीं। वहां उन्हें भाई को राखी बांधनी है। मुफ्त यात्रा पर खुश होकर बोलीं-महिलाओं को अच्छी सौगात है। पर जरूरत के मुताबिक बसें नहीं हैं। कई बसें खटारा हैं जो पांच घंटे के बाद ही कानपुर पहुंचाएंगी। फिर भी सीएम को थैंक्स।
कम पड़ी गईं 110 बसें, बढ़ाने पड़े फेरे
परिवहन निगम बांदा के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक मोहम्मद अजीम ने बताया कि रक्षाबंधन पर यात्रियों और खासकर महिलाओं की बढ़ी संख्या के मद्देनजर बसों के फेरे बढ़ाने पड़े। उन्होंने बताया कि बांदा डिपो में 135 बसें हैं। इनमें 110 चल रही हैं। मुख्यमंत्री के आदेश पर महिलाओं को फ्री बैठाया जा रहा है। बसों की संख्या बढ़ पाना मुमकिन नहीं था। लिहाजा विभिन्न रूटों पर चलने वाली बसों के फेरे बढ़ा दिए गए हैं। यह आधी रात तक चलेंगे। उन्होंने बताया कि महिलाओं की मुफ्त यात्रा के बाद भी यात्रियों की संख्या में बढ़ोत्तरी होने से निगम की आमदनी भी बढ़ी है। रोजाना लगभग 10 लाख रुपये की आमद होती है। रक्षाबंधन पर इसका ड्योढ़ा हो जाने की उम्मीद है।





