महाराष्ट्र में धोखाधड़ी के जरिए धर्मांतरण पर लगेगी लगाम

महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को जबरदस्ती, धोखाधड़ी, प्रलोभन या विवाह के जरिये मतांतरण पर रोक लगाने वाले ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026’ को विधानसभा में पेश किया। गृह राज्यमंत्री पंकज भोयर ने यह विधेयक पेश किया।
कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान है
इस विधेयक का मकसद धर्म की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार को बनाए रखना, गैरकानूनी मतांतरण के विरुद्ध कानूनी सुरक्षा कवच बनाना और मतांतरण की प्रक्रिया के लिए नियामक ढांचा तैयार करना है। विधेयक में गैरकानूनी मतांतरण में शामिल लोगों के लिए कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
विधेयक के मसौदे के अनुसार इसका मकसद गलतबयानी, जोर-जबरदस्ती, अनुचित प्रभाव, दबाव, प्रलोभन या शादी के जरिये किए जाने वाले गैरकानूनी मतांतरण को रोकना है।
सरकार का कहना है कि ऐसी हरकतों से सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है और किसी व्यक्ति के अपनी मर्जी से किसी भी धर्म को मानने व उसका पालन करने के संवैधानिक अधिकार को ठेस पहुंच सकती है।
मसौदे के अनुसार, किसी भी व्यक्ति या संस्था को उपहार, पैसा, रोजगार, मुफ्त शिक्षा, शादी का वादा, बेहतर जीवनशैली या दैवीय उपचार का प्रलोभन देकर किसी व्यक्ति का मतांतरण करने या उसका प्रयास करने की अनुमति नहीं होगी; इन सभी चीजों को ”प्रलोभन” की श्रेणी में रखा गया है। यह विधेयक बिल शादी या शादी के वादे के जरिये मतांतरण पर भी रोक लगाता है, यदि ऐसे कृत्यों में किसी प्रकार का प्रलोभन, जबरदस्ती या छल-कपट शामिल हो।
विधेयक का मसौदा
विधेयक के मसौदे के मुताबिक, जो भी व्यक्ति मतांतरण करना चाहता है, उसे जिला मजिस्ट्रेट को पहले से सूचना देनी होगी। कानून के तहत मतांतरण से 60 दिन पहले सूचना देना जरूरी है।
सूचना प्राप्त होने पर जिला मजिस्ट्रेट प्रस्तावित मतांतरण का विवरण अपने कार्यालय के सूचना पट्ट के साथ ही संबंधित ग्राम पंचायत या स्थानीय प्राधिकारी के कार्यालय में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करेगा।
इसके प्रकाशन के 30 दिनों के भीतर वह जनता से आपत्तियां आमंत्रित करेगा। मतांतरण के बाद 25 दिनों के अंदर इसका पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। मतांतरण करवाने वाले को भी अधिकारियों को पहले से सूचना देनी होगी। ऐसा नहीं करने पर प्रस्तावित कानून के तहत उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
मतांतरित व्यक्ति के माता-पिता, भाई-बहन या रक्त, विवाह अथवा गोद लेने के संबंध से जुड़े रिश्तेदारों को गैरकानूनी मतांतरण का संदेश होने पर एफआइआर दर्ज कराने की अनुमति है। साथ ही पुलिस के लिए ऐसी शिकायतों को दर्ज करना अनिवार्य है।
10 वर्ष तक कैद व पांच लाख तक जुर्माने का प्रावधान
प्रक्रियात्मक बाध्यताओं का पालन नहीं करने पर प्रस्तावित कानून के तहत दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है। विधेयक के अनुसार शादी की आड़ में गैरकानूनी मतांतरण में शामिल लोगों को सात वर्ष की कैद और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
किसी नाबालिग, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति, महिला या अनुसूचित जाति एवं और अनुसूचित जनजाति से संबंधित व्यक्ति के मामले में उल्लंघन करने पर सात साल की कैद और पांच लाख रुपये का जुर्माना होगा।
सामूहिक मतांतरण के मामले में भी सात वर्ष की जेल और पांच लाख रुपये का जुर्माना होगा। विधेयक के अनुसार, बार-बार अपराध करने वाले व्यक्तियों को 10 वर्ष तक की जेल और पांच लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है।
मतांतरण कराने वाले पर होगा साबित करने का जिम्मा
मतांतरण कानून विरुद्ध नहीं है, प्रस्तावित कानून के तहत यह साबित करने का जिम्मा उस व्यक्ति पर होगा जिसने मतांतरण करवाया या उसमें मदद की। इसके तहत अपराध संज्ञेय व गैर-जमानती होंगे और इनकी जांच सब-इंस्पेक्टर से कम रैंक का पुलिस अधिकारी नहीं करेगा।
विधेयक में गैरकानूनी मतांतरण के पीड़ितों को पुनर्वास में मदद देने और ऐसे मामलों से प्रभावित बच्चों के भरण-पोषण व कस्टडी के लिए भी प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं।
कई राज्यों में हैं कानून
जबरन मतांतरण के मामलों में बढ़ोतरी के बाद राज्य मंत्रिमंडल ने हाल में इस विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी थी। ओडिशा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और तमिलनाडु जैसे राज्यों में ऐसे मामलों के लिए नियम मौजूद हैं, लेकिन महाराष्ट्र में जबरन मतांतरण को नियंत्रित करने के लिए कोई कानून नहीं है।





