चाहकर भी भारत का कुछ नहीं कर पाएगा पाकिस्तान, क्योंकि सारे…

भारत सरकार ने जब से जम्मू-कश्मीर से जुड़े अनुच्छेद-370 खत्म किया है, तब से पाकिस्तान किसी भी तरह से भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिशें कर रहा है. कूटनीतिक मोर्चे पर बुरी तरह फेल हुए पाकिस्तान ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार और कूटनीतिक रिश्तों को खत्म करने का ऐलान कर दिया.

पाक के इस कदम से भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है बल्कि इससे गंभीर संकट से जूझ रही पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था जरूर बैठ सकती है. इसके पीछे वजह साफ है- पाकिस्तान भारत के व्यापारिक साझेदारों की सूची में बहुत ही नीचे आता है.

पाकिस्तान व्यापारिक नजरिए से भारत के लिए कितनी अहमियत रखता है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि भारत के व्यापारिक साझेदार देशों की सूची में पाकिस्तान का नंबर 28वें नंबर पर आता है.

2018-19 में भारत-पाक का कुल व्यापार भारत के कुल व्यापार का मुश्किल से 0.1 फीसदी था. 2018-19 में भारत ने पाकिस्तान को 2.06 अरब का निर्यात किया जबकि आयात केवल 0.49 अरब डॉलर का ही किया. भारत पाकिस्तान से खनिज, फल, नमक, सल्फर, चूना पत्थर, लेदर जैसी वस्तुएं मंगाता है और पाकिस्तान को केमिकल्स, प्लास्टिक, पेंट और मशीनरी बेचता है.

पाकिस्तान आतंकियों को दिए हैवी मशीन गन, LoC पर शुरू कर दिया है ये काम…

अमेरिका और चीन के साथ भारत के व्यापार की तुलना करें तो पाकिस्तान कहीं नहीं ठहरता है. भारत ने 2018-19 में सबसे ज्यादा व्यापार यूएस के साथ (87.96 अरब डॉलर) किया जबकि पड़ोसी देश चीन के साथ 87.07 अरब डॉलर का व्यापार हुआ. भारत अपने आयात और निर्यात दोनों के लिए इन दोनों देशों पर ही निर्भर है. 2018-19 में भारत ने यूएस को 52.41 अरब डॉलर का निर्यात किया और 35.55 अरब डॉलर का सामान आयात किया. भारत का चीन के साथ व्यापार संतुलन बहुत बड़ा है. भारत ने इसी अवधि के दौरान चीन को सिर्फ 16.75 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया जबकि 70.32 अरब डॉलर का भारी-भरकम आयात किया.

यूएस और चीन के अलावा, भारत के कुल व्यापार में यूएई, सऊदी अरब, हॉन्ग कॉन्ग, सिंगापुर, इराक, जर्मनी, दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया जैसे देशों की हिस्सेदारी 49.62 फीसदी (निर्यात में 45.47 फीसदी और आयात में 52.29 फीसदी) है.

भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बावजूद, पिछले चार वर्षों में भारत की निर्यात दर में बढ़ोतरी हुई है. वित्तीय वर्ष 2017 में आयात में 3.05 फीसदी (0.45 अरब डॉलर) की बढ़ोतरी, 2018 में 7.5 फीसदी (0.49 अरब डॉलर) और 2019 में 1.29 फीसदी (0.495 अरब डॉलर) की बढ़ोतरी हुई है.

2018-19 में भारत ने कुल 330 अरब डॉलर का निर्यात किया जिसमें से पाकिस्तान की हिस्सेदारी सिर्फ 0.6 फीसदी है. 2018-19 में भारत ने 514.08 अरब डॉलर का आयात किया जिसमें से पाकिस्तान का योगदान 0.1 फीसदी रहा. इन आंकड़ों में पिछले चार वर्षों में बहुत ही मामूली फर्क आया है.

पाकिस्तान का भारत के साथ व्यापार पर प्रतिबंध लगाने का फैसला ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था खुद ही चीन, सऊदी अरब, यूएई और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी वित्तीय संस्थाओं की मदद के भरोसे चल रही है. पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने 2018 में सरकारी आवास की भैंसे बेचकर और लग्जरी कारें नीलाम कर पैसे जुटाने की कोशिश की थी. भारत के साथ व्यापारिक रिश्ते खत्म कर पाकिस्तान ने खुद अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है.

सत्ता में आते ही इमरान खान ने सरकारी धन को बचाने के लिए अपने पूर्ववर्ती नवाज शरीफ की 8 भैंसे बेचने का कदम उठाया था. 

पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में सिर्फ 7.76 अरब डॉलर बचे हैं जो बांग्लादेश के 32 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार से भी बहुत ज्यादा नीचे है. पाकिस्तान की जीडीपी भी गिरावट की भविष्यवाणी की गई है. उसकी जीडीपी 4 फीसदी रहने का अनुमान है. पाकिस्तान में जून 2019 में महंगाई दर भी 8.8 फीसदी के रिकॉर्ड स्तर पर रही.

निवेश के माहौल पर स्टैंडर्ड ऐंड पुअर ने इस साल पाकिस्तान की क्रेडिट रेटिंग गिराते हुए बी कर दी है जो इन्वेस्टमेंट ग्रेड AAA से भी 6 पायदान नीचे आता है. इसका मतलब ये है कि पाकिस्तान के लिए विदेशी बॉन्ड मार्केट में पूंजी जुटाना भी मुश्किल हो जाएगा.

कूटनीतिक और व्यापारिक रिश्तों में कमी लाने के पाकिस्तान के फैसले से भारत पर कोई असर नहीं पड़ा है.  रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलवामा हमले के बाद से भारत पाकिस्तान के साथ व्यापार निलंबन की स्थिति को बनाए रखेगा. भारत ने पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा भी छीन लिया था और आयात ड्यूटी 200 फीसदी बढ़ा दी थी.

 

Back to top button