भाजपा के इन नेताओं के लिए राहत की खबर, लोकसभा चुनाव में उतरने का मिलेगा मौका

लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी जैसे बीजेपी (BJP) के तमाम बुजुर्ग नेताओं के लिए राहत की खबर है। यदि वह फिर से चुनाव मैदान में उतरना चाहेंगे, तो पार्टी इनकार नहीं करेगी। उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि यदि कोई मौजूदा सांसद फिर से चुनाव लड़ना चाहता है, तो उसे मौका देने में पार्टी को कोई एतराज नहीं होगा। उम्र के कारण पार्टी टिकट नहीं काटेगी। यह भी खबर है कि जीतने योग्य उम्मीदवार को ज्यादा उम्र के बावजूद टिकट दिया जा सकता है, भले ही वह अभी सांसद न हो। भाजपा के इन नेताओं के लिए राहत की खबर, लोकसभा चुनाव में उतरने का मिलेगा मौका

बीजेपी में ऐसे सांसदों की संख्या करीब डेढ़-दो दर्जन से ऊपर होने का अनुमान है, जो 75 साल की उम्र पार कर चुके हैं। सबसे वयोवृद्ध लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी एवं शांता कुमार हैं। आडवाणी 91 वर्ष, जोशी 85 वर्ष तो शांता कुमार 84 वर्ष के हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार 75 साल की उम्र सीमा सिर्फ मंत्री बनाने के लिए है, लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए नहीं। इसलिए जो बुजुर्ग नेता हैं, उन्हें खुद ही निर्णय लेना होगा कि वह चुनाव लड़ना चाहते हैं या नहीं। जो लड़ना चाहेंगे उन्हें पार्टी टिकट देगी। 

पार्टी के इस रुख से माना जा रहा है कि आडवाणी, जोशी के अलावा कई और बुजुर्ग सांसद फिर चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। इनमें बिहार से 79 वर्षीय हुकुमदेव नारायण,मध्य प्रदेश से 75 वर्षीय सुमित्रा महाजन, हिमाचल प्रदेश से शांता कुमार, उत्तर प्रदेश से 77 वर्षीय कलराज मिश्र  तथा उत्तराखंड से 76 वर्षीय भगत सिंह कोश्यारी  शामिल हैं। 

उत्तराखंड से 84 वर्षीय मेजर जनरल बीसी खंडूरी भी सांसद हैं। लेकिन वह खुद ही चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर चुके हैं। इसी प्रकार कर्नाटक से 75 वर्षीय वी. एस. येदियुरप्पा को भी फायदा होगा। उन्हें इस बार फिर टिकट मिल सकता है। दरअसल, पिछला लोकसभा चुनाव उन्होंने शिमोगा सीट से लड़ा था। लेकिन पिछले साल विधानसभा चुनाव में उतरने के कारण लोकसभा से इस्तीफा दे दिया था। राज्य में सरकार नहीं बनी। इसलिए पुन लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। ऐसे और भी कई उम्मीदवार हो सकते हैं। 

जीत का फैक्टर भी अहम

सूत्रों के अनुसार बीजेपी के इस रुख को अहम माना जा रहा है। दरअसल, उम्रदराज होने के बावजूद इनमें से ज्यादातर नेता ऐसे हैं, जो अपनी सीटों को दोबारा जीतने की क्षमता रखते हैं। लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के गठबंधन की चुनौती के मद्देनजर पार्टी जीत के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती है। इसलिए महज उम्र के आधार पर टिकट देने से इनकार नहीं किया जाएगा। 

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