भाई को कंधे पर लेकर दौड़ा, नहीं मिला इलाज, डॉक्टरों के सामने छह घंटे तड़पकर मौत


बिहार निवासी जाएदा खान ने बताया कि कुछ महीने पहले उनके पति नुरूल इस्लाम को अचानक नाक और मुंह से खून आने लगा था। बेतिया जिले के स्थानीय अस्पताल में इलाज से राहत मिली, लेकिन एक माह बाद फिर बुखार और गले में दर्द ने परेशान कर दिया। डॉक्टरों ने गोरखपुर रेफर कर दिया।
वहां कोई राहत नहीं मिल रही थी। गले में गांठ बन रही थी और दर्द हो रहा था। रविवार रात में डॉक्टरों ने लोहिया संस्थान रेफर कर दिया। यहां सुबह लेकर आए तो डॉक्टरों ने ओपीडी खुलने का इंतजार करने को कहा।
मजबूरी में भाई ने कंधे पर लादकर उसे इमरजेंसी तक पहुंचाया। वहां से एक इंजेक्शन लगाकर वापस ओपीडी भेज दिया। जाएदा खान ने बताया कि ओपीडी में आने के बाद फिर से डॉक्टरों ने देखने से साफ मना कर दिया।
इस करीब डेढ़ बजे मरीज के मुंह से झाग निकलने लगा तो डॉक्टरों ने लोहिया अस्पताल भेज दिया। मरीज को कंधे पर लादकर जब तक परिवारीजन लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचते उसकी मौत हो गई।
वहां जाने के बाद काउंटर पर बैठी महिला ने कहा कि 11 अगस्त को आइए डॉक्टर खाली नहीं हैं। रामनाथ ने बताया कि जाएदा उस महिला के पैरों पर गिर गई, लेकिन उसने साफ मना कर दिया।
डॉक्टरों से बात करूंगा
मामले पर डॉ. लोहिया संस्थान के निदेशक डॉ. दीपक मालवीय का कहना है कि घटना की जानकारी नहीं है। मरीज अगर रेफर था तो उसे सीधे इमरजेंसी जाना चाहिए था। वैसे यह बड़ी लापरवाही है। मैं इस बारे में डॉक्टरों से बात करके जानकारी लूंगा। इस प्रकार की लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।





