बलूचिस्तान के खजाने पर ट्रंप-शहबाज की नजर!

अमेरिका ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान में सोने और तांबे के माइनिंग प्रोजेक्ट के लिए लगभग 1.3 बिलियन डॉलर निवेश करने की घोषणा की है। पाकिस्तान-ईरान सीमा के पास स्थित रेको डिक प्रोजेक्ट कुल 7 बिलियन डॉलर का प्रोजेक्ट है और उम्मीद है कि 2028 के अंत तक इसमें प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा।
यह प्रोजेक्ट कनाडाई माइनर बैरिक माइनिंग कॉर्प द्वारा पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ साझेदारी में विकसित किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में यूनाइटेड स्टेट्स के एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक (EXIM) के जरिए अमेरिकी निवेश किया जाएगा।
सुरक्षा को लेकर चिंताएं
इस प्रोजेक्ट में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी बैरिक की है, जबकि बाकी 25 प्रतिशत हिस्सेदारी तीन फेडरल सरकारी कंपनियों की है और 25 प्रतिशत हिस्सेदारी बलूचिस्तान सरकार की है।
बलूचिस्तान में अलगाववादियों और जिहादियों के लगातार हमले होते रहते हैं, जिससे खदान के लिए सुरक्षा एक बड़ी चिंता का विषय है। इस प्रोजेक्ट के लिए तांबे के कंसंट्रेट को कराची तक ले जाने और फिर विदेश में प्रोसेसिंग के लिए रेलवे लाइन को अपग्रेड करने की भी जरूरत है।
निवेश
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन और एशियन डेवलपमेंट बैंक सहित अन्य लेंडर्स मिलकर 2.6 बिलियन डॉलर से ज्यादा का फाइनेंसिंग पैकेज तैयार कर रहे हैं। रेको डिक पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण है।
इस्लामाबाद इस खदान पर अपनी मिनरल रणनीति को मजबूत करने के लिए निर्भर है, जबकि कनाडाई माइनर अपने सबसे बड़े लॉन्ग-टर्म प्रोजेक्ट्स में से एक को आगे बढ़ा रहा है।
शहबाज शरीफ सरकार ने इस कदम का स्वागत किया और इसे देश के माइनिंग सेक्टर और आर्थिक सुधारों पर भरोसे का वोट बताया। इस्लामाबाद को उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट अपने पूरे समय में अरबों डॉलर का रेवेन्यू देगा और पैसे की कमी से जूझ रहे देश के विकास में अहम योगदान देगा।





