जीएसटी विधेयक को पारित कराने की तैयारी में सरकार

जीएसटी काउंसिल प्रस्ताव जीएसटी की दरें पहले ही तय कर चुकी है लेकिन अब किस वस्तु और किस सेवा पर कितनी दर से जीएसटी वसूला जाएगा, यह अधिकारियों की समिति तय करेगी। जेटली ने शुक्रवार को यहां कहा कि जीएसटी काउंसिल विधेयकों के मसौदे को अंतिम रूप दे चुकी है।जीएसटी विधेयक को पारित कराने की तैयारी में सरकारइन विधेयकों के मसौदे पर कानूनी राय मिलने के साथ ही 18 फरवरी को होने वाली काउंसिल की बैठक में इस पर मुहर लगा दी जाएगी। इसके बाद 9 मार्च को शुरु हो रहे बजट सत्र के दूसरे चरण में सीजीएसटी और आइजीएसटी विधेयकों को पारित कराया जाएगा।

आम बजट के बाद उद्योग संगठन फिक्की, सीआइआइ, एसोचैम और आइसीसी के प्रतिनिधियों के सवालों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने यह बात कही। उल्लेखनीय है कि बजट सत्र का पहला चरण 9 फरवरी को समाप्त हो रहा है। संसद के साथ-साथ राज्य विधानमंडलों को भी एसजीएसटी विधेयक पारित करने होंगे। इसके अलावा केंद्र को सीजीएसटी विधेयक संसद से पारित करना होगा। इस विधेयक के पारित होने पर ही राज्यों को पांच साल तक राजस्व क्षति की भरपाई की जाएगी।

वस्तुओं और सेवाओं पर प्रस्तावित जीएसटी की दरों के बारे में राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने कहा कि इस संबंध में फार्मला तय किया जा चुका है। फिलहाल जिन वस्तुओं पर वैट और केंद्रीय उत्पाद शुल्क मिलाकर जितना टैक्स बनता है वे जीएसटी की निकटवर्ती श्रेणी मेे आएंगी। जीएसटी की चार प्रस्तावित दरें- पांच प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत पहले ही तय की जा चुकी हैं।

एक सवाल के जवाब में जेटली ने कहा कि राजकोषीय घाटे का 3.2 प्रतिशत लक्ष्य व्यवहारिक है। वित्त मंत्री ने विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड को खत्म करने के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि यह लालफीताशाही को खत्म करने के लिए किया गया है।

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