‘बच्चों को देश के बंटवारे के बारे में बताना चाहिए’: सुधा मूर्ति

राज्यसभा सांसद और इंफोसिस फाउंडेशन की अध्यक्ष सुधा मूर्ति ने कहा कि जब मैं देश के बंटवारे को देखती हूं तो मुझे लगता है कि बच्चों को यह बताया जाना चाहिए कि ऐसा हुआ था, जो गलत था। ऐसा दोबारा नहीं होना चाहिए। मुझे उन लोगों को लेकर दु: ख होता है, जिन्हें आज के पाकिस्तान और बांग्लादेश से अपना घर छोड़कर आना पड़ा।
एक ऐसा इंसान जिसे भारत की संस्कृति, भाषा और लोगों के बारे में कुछ भी पता नहीं हो, उसने सिर्फ पेंसिल से एक लाइन खींच दी और कहा कि आज से यह जमीन आपकी नहीं है। यह जमीन विदेशी है। अगर कोई मुझसे कहे कि कर्नाटक अब आपका नहीं है तो कितना दर्द होगा।
यह बातें उन्होंने शनिवार को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में अपनी किताब ”द मैजिक ऑफ द आस्ट इयरिंग्स” पर एक सत्र में बोलते हुए कहीं। उन्होंने बताया कि उनके दामाद ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋिषी सुनक का परिवार पाकिस्तान छोड़कर कैसे लंदन तक पहुंचा। सुनक के दादा-दादी पाकिस्तान के लाहौर असल में गुजरांवाला के निवासी थे।
विभाजन के समय उन्हें अपना व्यापार, घर, पैसा छोड़कर बिना कुछ लिए अफ्रीका जाना पड़ा। वहां उन्होंने नए सिरे से जीवन खड़ा किया। इसके बाद वे वहां से लंदन चले गए। उस समय सुनक दस साल के थे। परिवार ने दो बार अपना घर खोया। इसके बावजूद उन्होंने जीरो से शुरूआत की। आज उनका परिवार जहां है, वह उसी संघर्ष एवं मेहनत का नतीजा है।
कहा कि भारत में सिंध नाम की कोई जगह नहीं है। जो लोग वहां रहते थे, वे एक दिन में सड़क पर आ गए, शरणार्थी बन गए। सिंधियों के पास कुछ नहीं रहा। मैं जो सोचती हूं और वास्तव में देखती हूं उसे किताबों में लिख देती हूं। मैने बच्चों के लिए 15 साल में 25 से ज्यादा किताबें लिखी है। मैंने अपनी दोहिती अनुष्का के लिए भी किताब लिखी है। करीब 20 साल पहले मैं पाकिस्तान गई थी। वहां रावलपिंडी में श्रीमती कोहली को देखा वह अपने पुराने घर को देखकर रो रही थी।





