बच्चों की गलतियों को सुधारने का सबसे सही तरीका, बिना डांटे ऐसे मनवाएं अपनी बात

माता-पिता बनना दुनिया का सबसे खूबसूरत एहसास है, लेकिन सच कहें तो यह कोई आसान काम भी नहीं है।
बच्चे हैं तो घर में शैतानी भी होगी और गलतियां भी। अक्सर जब बच्चे कोई बड़ी गलती करते हैं या बात नहीं मानते, तो हमारा सबसे पहला रिएक्शन उन पर चिल्लाना या उन्हें डांटना होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि क्या वाकई डांटने से बच्चे सुधरते हैं?
मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि बार-बार डांटने से बच्चे या तो और ज्यादा जिद्दी हो जाते हैं, या फिर वे अपने ही माता-पिता से डरने और बातें छिपाने लगते हैं। ऐसे में, सवाल यह है कि बच्चों को सही-गलत का फर्क कैसे समझाया जाए? आइए जानते हैं कुछ ऐसे जादुई तरीके जिनसे आप बिना गुस्सा किए अपनी बात मनवा सकते हैं।
गुस्सा थूकें और पहले उनकी बात सुनें
जब बच्चा कोई गलती करे, तो तुरंत भड़कने के बजाय एक गहरी सांस लें और खुद को शांत करें। बच्चों के पास अपनी हर हरकत का अपना एक मासूम सा कारण होता है। उनसे प्यार से पूछें, “बेटा, आपने ऐसा क्यों किया?” जब आप उनकी बात ध्यान से सुनते हैं, तो उन्हें लगता है कि आप उन्हें समझ रहे हैं। इससे उनका आप पर भरोसा बढ़ता है।
सजा न दें, बल्कि गलती का असर समझाएं
बच्चों को डराने के बजाय उन्हें यह बताना जरूरी है कि उनके काम का क्या नतीजा हो सकता है। मान लीजिए बच्चे ने खेलते-खेलते पानी का गिलास गिरा दिया है। उसे थप्पड़ मारने या डांटने के बजाय कहें, “ओह! पानी गिर गया। अब कोई फिसल कर गिर सकता है, चलो हम दोनों मिलकर इसे साफ करते हैं।” इससे बच्चे को जिम्मेदारी का एहसास होता है और वह गलती सुधारना सीखता है।
‘ना’ कहने का स्मार्ट तरीका अपनाएं
दिन भर “ये मत करो”, “वहां मत जाओ” सुनने से बच्चे चिढ़ जाते हैं और वही काम छिपकर करते हैं। मना करने के तरीके को थोड़ा स्मार्ट बनाएं। अगर बच्चा दीवार पर क्रेयॉन चला रहा है, तो उस पर चिल्लाने के बजाय प्यार से कहें, “अरे वाह! आप तो बहुत अच्छी ड्राइंग करते हो, चलो इस नई कॉपी में बनाकर देखते हैं।” इससे बच्चे का ध्यान भी भटक जाएगा और आपकी बात भी रह जाएगी।
खुद एक अच्छा उदाहरण बनें
एक बात हमेशा याद रखें- बच्चे हमारे बोले हुए शब्दों से ज्यादा हमारी हरकतों से सीखते हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा अपनी गलती माने, तो आपको भी अपनी गलती पर ‘सॉरी’ बोलना सीखना होगा। जब बच्चे देखते हैं कि उनके मम्मी-पापा भी अपनी गलती मानकर माफी मांग लेते हैं, तो उनके लिए भी अपनी गलती मानना एक सामान्य बात बन जाती है।
बच्चों की परवरिश कोई रेस नहीं है, बल्कि एक ऐसा सफर है जिसमें ढेर सारे धैर्य की जरूरत होती है। प्यार और समझदारी से आप किसी भी जिद्दी से जिद्दी बच्चे का दिल जीत सकते हैं। अगली बार जब आपका बच्चा कोई गलती करे, तो डांटने के बजाय उसे गले लगाकर सही बात समझाने की कोशिश कीजिएगा। यकीन मानिए, बदलाव आपको खुद नजर आएगा।





