पढ़े शहर के शंकर नगर के चार दोस्तों की कहानी, क्या आप भी बन सकते हैं इनकी तरह

शहर के शंकर नगर के चार दोस्तों की कहानी अब एक नजीर बन चुकी है। सोशल मीडिया पर बड़ी-बड़ी बातें करने वाले भी इन चार दोस्तों की कहानी पर अमल करके अच्छी पहल शुरू कर सकते हैं, जो आने वाले भविष्य के लिए बहुत फायदेमंद और जीवन रक्षक हो सकती है। इन चार दोस्तों ने वो काम करके दिखाया है, जो आज के युवा सिर्फ सोशल मीडिया पर शेयर करके सिर्फ संदेशवाहक बने हैं लेकिन आगे आकर कुछ करने के लिए बहुत कम ही तैयार होते हैं।

जल ही जीवन है, संरक्षण जरूरी

ऐसा कहा जाता है कि अगला विश्व युद्ध पानी के लिए होगा, इसलिए अभी से पानी की कीमत अभी से समझनी होगी। जल को जीवन बताया गया है, इसलिए जल को सहेजने के प्रयास अभी से शुरू करने होंगे। इन्हीं बातों चकेरी के शंकर नगर निवासी मुकेश मिश्रा, अजय श्रीवास्तव, प्रमोद सिंह व दिलीप शर्मा ने को आत्मसात किया। शुरू से पानी बचाने की तमन्ना दिल में लिए इन चार दोस्तों ने हकीकत पर उतारा। इनसे शंकर नगर स्थित 600 साल पुराने शेरशाह सूरी तालाब की दुर्दशा देखी नहीं गई। चारों ने अपने हाथों को हथियार बनाया और एक साल में तालाब को पानी से लबालब कर दिया। तालाब में भरपूर पानी होने के चलते अब क्षेत्र में भूगर्भ जल का स्तर बहुत अच्छा हो गया है।

लोगों को बताते पानी का महत्व, देते संरक्षण का संदेश

चारों दोस्तों ने सबसे पहले तालाब किनारे झाडिय़ों को साफ किया। इसके बाद तालाब में गिरने वाला सीवरेज रोकने के लिए लंबा संघर्ष किया। लोगों को पानी का महत्व बताया कि जब पानी को ऐसे ही गंदा करोगे और एक दिन तालाब भी नहीं बचेगा तब इसका दंश हमें ही झेलना पड़ेगा। सीवरेज गिरने से रोकने के लिए कई बार तो लोग उनसे लडऩे तक को तैयार हो गए। काफी समझाने के बाद सीवरेज को तालाब में गिरने से रोक सके। तालाब में मछलियों को डाला जिससे पानी की गंदगी साफ हो सके। आज तालाब किनारे लोग सुबह शाम परिवार के साथ टहलने आते है और तालाब में मछलियों को ब्रेड व आटा खिलाकर खुश होते हैं।

15 हजार से हुई थी शुरुआत

तालाब को संवारने के लिए चारों दोस्तों ने शुरुआत में 15 हजार रुपये खर्च किए। तालाब पर अतिक्रमण न हो इसके लिए बिना किसी सरकारी मदद के चारों तरफ जाली लगवाई। तालाब किनारे ही खरगोश, बतख व विदेशी पक्षी पले हैं। आज तालाब व पशु पक्षियों में करीब एक लाख रुपये प्रति माह खर्च होता है जिसे इलाके के लोग खुद ही वहन करते हैं। चारों दोस्तों ने इलाके में रहने वाले लोगों को पानी की फिजूलखर्ची रोकने के लिए प्रेरित किया। उनकी मेहनत व लगन देख इलाके के साथ आसपास के लोग उनसे जुड़े। जिसके बाद शेरशाह सूरी तालाब संरक्षण समिति का गठन हुआ और आज लोग परिवार की तरह तालाब की देखभाल करते हैं।

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