पूर्व पीएम का सिख दंगो दिए बयानों पर उठा बड़ा सवाल, कांग्रेस ने किया नरसिम्हा…

1984 के सिख दंगा पीड़ितों को अब भी पूरे इंसाफ का इंतजार है. कई कमेटियां और लंबी क़ानूनी प्रक्रिया के बावजूद उन्हें इंतजार है कब उनके जख्मों पर मरहम लगेगा लेकिन इन दंगों के 35 साल बाद देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राजीव गांधी को सिख दंगा मामलों में क्लीनचिट देते हुए आरोप लगाया है कि अगर तत्कालीन गृह मंत्री नरसिम्हा राव चाहते तो दंगों को रोका जा सकता था. मनमोहन सिंह ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस नेता इंद्र कुमार गुजराल ने नरसिम्हा राव से आर्मी को तैनात करने के लिए कई बार कहा जिसे नरसिम्हा राव ने नहीं माना वर्ना दंगों को रोका जा सकता था. ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि सिख दंगों में कांग्रेस की साजिश तो नरसिम्हा राव को सजा क्यों? सिख दंगों पर गांधी परिवार को मनमोहन सिंह की क्लीन चिट दी जा रही है?

उधर, नरसिम्हा राव के पोते एन वी सुभाष ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है “उनको (पूर्व पीएम मनमोहन सिंह) ये जानकारी होना चाहिए कि सिर्फ एक गृहमंत्री कुछ निर्णय नहीं ले सकते हैं. अगर कुछ इल्जाम लगाना है तो पूरी तरह से कांग्रेस पार्टी पर इल्जाम लगाना चाहिए, राजीव गांधी की सरकार थी, उन पर इल्जाम लगाना था और नरसिम्हा राव का देहांत के 15 साल बाद ये मुद्दा उठाना इससे हमलोग आहत है हम इसका विरोध करते हैं.”
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कांग्रेस ने किया नरसिम्हा राव का अपमान?
23 दिसंबर 2004 को दिल्ली में नरसिम्हा राव निधन हुआ. नरसिम्हा राव के निधन के समय केंद्र में UPA सरकार थी. कांग्रेस ऑफिस में औपचारिक श्रद्धांजलि सभा हुई. परिवार की इच्छा के खिलाफ हैदराबाद में अंतिम संस्कार किया गया. नरसिम्हा राव के अंतिम संस्कार में कांग्रेस के बड़े नेता शामिल नहीं हुए थे. हैदराबाद में हुसैन सागर झील के किनारे नरसिम्हा राव का स्मारक बनाया गया. कांग्रेस ने नरसिम्हा राव को नज़रअंदाज़ किया.
सिख दंगा पीड़ितों को इंसाफ कब?
सिख विरोधी दंगों के बाद दिल्ली में कुल 650 मामले दर्ज हुए थे. 267 मामले दिल्ली पुलिस ने बंद कर दिए थे. सिख विरोधी दंगों में से 5 मामलों की जांच बाद में CBI ने की. 2015 में SIT ने 60 मामलों को जांच के लिए सही पाया. SIT ने 52 मामलों में जांच बंद करने की सिफ़ारिश की. सिख विरोधी दंगों के आरोप में 448 लोग दोषी ठहराए गए. 17 दिसंबर 2018 को सज्जन कुमार को उम्र कैद की सज़ा हुई. सज्जन समेत 6 आरोपियों को दिल्ली हाईकोर्ट ने सज़ा सुनाई. दंगे के दोषी यशपाल को मौत की सज़ा, दूसरे दोषी नरेश को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई.
सिख दंगों में देश जलता रहा, राजीव देखते रहे!
84 में सिख दंगों के वक्त राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री थे. राजीव गांधी पर दंगा भड़काने वालों पर सख्ती नहीं करने का आरोप है. इंदिरा की हत्या से नाराज लोगों पर नियंत्रण रखने में नाकामी का आरोप है. दिल्ली में सिख दंगों में कांग्रेस के कई नेताओं के शामिल होने का आरोप है. राजीव गांधी ने दंगों के दौरान ही भड़काऊ बयान दिया था. राजीव गांधी ने कहा- बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती थोड़ी हिलती है, राजीव गांधी के बयान से दंगा भड़काने वालों को बल मिला. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने नवंबर, 1984 में सिख दंगों पर कहा था, “जब इंदिरा जी की हत्या हुई थी तो हमारे देश में कुछ दंगे फसाद हुए. हमें मालूम है कि भारत की जनता के दिल में कितना क्रोध आया, कितना गुस्सा आया और कुछ दिन के लिए लोगों को लगा कि भारत हिल रहा है, लेकिन जब भी कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती थोड़ी हिलती है.”





