पूजा करें जरूर लेकिन कर्म प्रधान बनने से ही मिलेगी सफलता

आंख बंद करके भगवान को मानने वाले ऐसे लोगों को हम भोले मनुष्य ही कहेंगे। उन्हें कर्म प्रधान बनने के बारे में सिखाया नहीं जाता है। आदमी दिन-रात मंदिर में पूजा-पाठ में लगा रहता है, पीछे चाहे काम का कुछ भी नुकसान हो जाए। व्यक्ति से कामकाज के बारे में मिलने के लिए बोलोगे तो कहेगा, नहीं अभी नहीं, अभी मुझे नहा-धोकर मंदिर जाना, वहां एक घंटा पूजा में लगेगा और उसके बाद तरक्की के लिए कुछ उपाय करने नहर पर जाना है, वहां से आते-आते आधा घंटा और लगेगा। तो देखा कैसे वे अपने काम के समय को भगवान को अर्पित कर जीवनभर तरक्की खोजता रहता है।

पर शायद उसे यह नहीं मालूम कि हमारे सभी शास्त्रों में और विशेष रूप से भागवत गीता में भी यही कहा गया है कि कर्मशील बनें, सत्कर्म से भाग्य को भी बदला जा सकता है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि हमारे भगवानों के जितने भी चित्र हैं, वे हमें शिक्षा देने के लिए ही हैं कि हम लोगों को अपना स्वरूप कैसा बनाना चाहिए। हमें दिन-रात क्या आचरण करना चाहिए ताकि समृद्धि आ सके ना कि काम धंधा छोड़कर दिन-रात देवताओँ के मंत्रों के साथ लगे रहना चाहिए।
लक्ष्मी जी के स्वरूप में लक्ष्मी जी के बाईं ओर सरस्वती जी विराजमान रहती हैं और दाईं ओर गणेश जी विराजमान रहते हैं और उनके पीछे दो सफेद हाथी होते हैं,जो कलश में से गंगा बहा रहे हैं। लक्ष्मीजी के इस चित्र में ज्ञान अथवा हुनर की प्रतीक सरस्वती जी को दिखाने का अर्थ है कि व्यक्ति को जीवन में अच्छा ज्ञान अर्जित करना चाहिए, ताकि उसके बल पर वे हुनरमंद बन सके और अपनी जीवनयापन अच्छे तरीके से कर पाएं। सभी जानते हैं कि गणेशजी का स्वरूप और आचरण बताया गया है कि एक जगह बैठो अर्थात जमकर डटे रहो।
यह हमें सिखाता है कि मां सरस्वती से काम-धंधे की शिक्षा लेकर अपने हुनर में प्रवीण होकर यदि व्यक्ति गणेशजी की तरह जमकर काम करेगा तो लक्ष्मीजी यानी धन की प्राप्ति अवश्य होगी। इस चित्र में पीछे बने दो सफेद हाथी राहु का प्रतीक है, राहु अर्थात हमारे ज्ञान के कारण हमारे कार्य अथवा व्यापार को बढ़ाने के लिए हमारे दिमाग में आने वाले अचानक विचार जो जैसी ही हमारी बुद्धि में आएं, उनके अपने व्यवसाय पर लागू कर दें अर्थात कलश से ज्ञान की गंगा बहा दैं, जिस प्रकार वो हाथी सदा गंगा बहाते रहते हैं।
जैसो ही यह ज्ञान की गंगा बहाएंगे, दुनिया में अपने काम-धंधे में ये सकारात्मक लाभकारी विचार लागू करेंगे तो फिर साक्षात् लक्ष्मी जी सिक्के बरसाती हुई विराजमान हो जाएंगी यानी कि लक्ष्मीजी अर्थात पैसा आना शुरू हो जाएगा। इस तरह से संसार में मनुष्य अच्छे ज्ञान के द्वारा अच्छे कर्म करके स्थाई धन खूब कमा सकता है ना कि तीन-चार घंटे मंत्र जप करके। चार-चार घंटे लक्ष्मी यंत्र स्थापित करने से व दिन-रात धूपबत्ती करने से या आंख बंद करके उपाय करने से व्यक्ति तरक्की के मार्ग पर नहीं पहुंचता है।
मां लक्ष्मी के पति विष्णुजी को माना गया है। विष्णु जी का स्वरूप देखें कि वो स्वस्थ्य, आकर्षक, चमकते हुए खड़े हैं। गले में सोना सुशोमित हो रहा है व वेशभूपषा राजसी है। तिरुपति बालाजी को देखिए स्वर्ण शरीर पर सुशोभित हो रहा है व रंग उनका सांवला दिखाया गया है। इसका कारण भी है कि जो पुरुष अपने घर से कमाई करने के लिए निकलेगा, धूप से उसका वास्ता पड़ेगा, मेहनत करेगा और धूल-मिट्टी फांककर आएगा तो उसका रंग भला गोरा कहां रहेगा, सांवला ही हो जाएगा।
आम मानस के लिए इसका संदेश है कि व्यक्ति अपने कार्य क्षेत्र में लगकर ईमानदारी से खूब मेहनत करे और मेहनत से यदि इसके शरीर की सुंदरता न रहे व रंग भी सांवला हो जाए परंतु इतना धन जरूर अर्जित होना चाहिए ताकि वे अपनी गृहस्थी का सुचारू रूप से संचालन कर पाए। उसके तन पर अच्छे वस्त्र व गहने आ जाएं, इसी को समृद्ध विष्णुजी का स्वरूप कहा गया है। तिरुपति बालाजी का तस्वीर के अंदर महालक्ष्मी का वास उनके सीने में दिखाया गया है।
इसका अर्थ है कि इंसान अपने घर को समृद्ध बनाने के लिए अपने मन में संकल्प लेकर चलेगा और अपने ज्ञान से सत्कर्म करता हुआ मेहनत से धन कमाकर लेकर आएगा यानी कि विष्णु स्वरूप बन जाएगा। इसका अर्थ है कि छोटी-छोटी बातों में उलझे रहने की जगह एक-दूसरे की बुराई करने की बजाए अपने ज्ञान का विस्तार करो, हुनर को और अच्छा करो और फिर जम कर अपने कार्यक्षेत्र में मेहनत करो और अपने घर के विष्णु बन जाओ। विष्णुजी के साधारण रूप मे चार हाथ चित्र में दिखाए जाते हैं, लेकिन विराट स्वरूप में हजारों हाथ दिखाए गए है।
बिल गेट्स के शब्दों में कि जब तक मेरे लिए लाखों हाथ काम नहीं करेंगे, मैं बहुत समृद्धशाली नहीं बन सकता, यह शब्द स्पष्ट रूप मे विराट विष्णु स्वरूप को परिभाषित करते हैं। और हमें सिखाते हैं कि समद्ध विष्णु कैसे बनना है। लक्ष्मी आपके घर पर बैठी हैं, आपकी पत्नी को रूप में, वे जितनी भी समृद्ध होगी अर्थात जितने अच्छे वस्त व गहने पहनेंगी, आप उतने ही समद्ध विष्णु कहलाएंगे।
आपका सम्मान बढ़ेगा, आपका परिवार सुखी रहेगा, आपके घर में खुशहाली आएगी और जीवन सफल हो जाएगा। आप अपने कार्य क्षेत्र में खूब व्यस्त रहें, खूब कमाई करें। पूजा-पाठ मे चार-चार घंटे मत खराब करें, कर्म अचछा करें। पूजा इसलिए करें ताकि सात्विक रहें, किसी का बुरा सोचने या करने के बारे में विचार न आए, असहायों की मदद करें व जो संस्कृति हमें अपने मां-बाप से मिली है, उसके अनुसार संस्कृतिवान बना अपने परिवार के संभाले।





