न्यू टैक्स रिजीम में होने जा रहे हैं ये 5 बड़े बदलाव? टैक्सपेयर्स की बल्ले-बल्ले!

बजट 2025 में टैक्स स्लैब और रिबेट बढ़ाने के बाद ‘न्यू टैक्स रिजीम’ (New Tax Regime) काफी आकर्षक बन गया है। अब यह सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि डिफॉल्ट चॉइस बनता जा रहा है। लेकिन जैसे-जैसे बजट 2026 नजदीक आ रहा है, सवाल यह है कि क्या सरकार इसे और भी फायदेमंद बनाएगी?
भले ही सरकार का जोर बिना किसी डिडक्शन (Deduction) वाली साफ-सुथरी व्यवस्था पर है, लेकिन सीनियर सिटीजन्स और होम लोन चुकाने वालों के लिए ओल्ड रिजीम अभी भी मायने रखता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बजट 2026 में न्यू टैक्स रिजीम में ये 5 बड़े बदलाव गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।
न्यू टैक्स रिजीम में हो सकते हैं ये 5 बड़े बदलाव
1. HRA और हेल्थ इंश्योरेंस की वापसी? (Limited Deductions)
न्यू टैक्स रिजीम की सबसे बड़ी कमी यह है कि इसमें HRA और मेडिकल इंश्योरेंस क्लेम करने की सुविधा नहीं है। बढ़ते इलाज के खर्च को देखते हुए यह एक बड़ा झटका है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
आनंद राठी वेल्थ की श्वेता राजानी और डेलॉयट इंडिया के नितिन बैजल का मानना है कि अगर HRA और मेडिक्लेम जैसी कुछ जरूरी कटौतियों को न्यू रिजीम में शामिल कर लिया जाए, तो इसकी लोकप्रियता कई गुना बढ़ जाएगी।
2. Standard Deduction Hike: स्टैंडर्ड डिडक्शन में बड़ी बढ़ोतरी?
अभी न्यू रिजीम में सबसे बड़ी राहत स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) ही है। महंगाई को देखते हुए इसे बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। स्टॉकटिक कैपिटल के विजय माहेश्वरी का कहना है कि महंगाई की भरपाई के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर 1 से 1.25 लाख रुपये कर देना चाहिए। इससे नौकरीपेशा लोगों की टेक-होम सैलरी (Take-home salary) बढ़ेगी।
3. होम लोन और एजुकेशन लोन पर छूट
घर और पढ़ाई का लोन मिडिल क्लास के लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ है। अभी इनका फायदा सिर्फ ओल्ड रिजीम में मिलता है। एक्सपर्ट्स का तर्क है कि होम लोन और एजुकेशन लोन का डेटा बैंकों के पास पहले से मौजूद है, इसलिए इसे न्यू रिजीम में शामिल करने से सिस्टम जटिल नहीं होगा और लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
4. सीनियर सिटीजन्स के लिए खास बदलाव
सीनियर सिटीजन्स अभी भी न्यू रिजीम से दूरी बनाए हुए हैं क्योंकि इसमें मेडिकल खर्चों पर छूट नहीं मिलती और बेसिक एग्जेम्पशन लिमिट (Basic Exemption Limit) भी ज्यादा नहीं है। रिटायरमेंट के बाद मेडिकल खर्च बढ़ जाते हैं, इसलिए बजट 2026 में बुजुर्गों के लिए टैक्स स्लैब में बदलाव या अतिरिक्त राहत दिए जाने की पूरी संभावना है।
5. लॉन्ग टर्म इनवेस्टमेंट पर फोकस
सिर्फ टैक्स फाइलिंग आसान करना काफी नहीं है, न्यू रिजीम को लॉन्ग-टर्म प्लानिंग में भी मदद करनी चाहिए। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इक्विटी LTCG (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स) की लिमिट को बढ़ाकर 2-3 लाख रुपये किया जाना चाहिए ताकि निवेशक शेयर बाजार में भरोसे के साथ पैसा लगा सकें।





