नीति आयोग ने आयुर्वेद के लिए ग्लोबल रजिस्टर बनाने का दिया सुझाव

नीति आयोग ने गुरुवार को सरकार को एक खास सुझाव दिया है। आयोग ने आयुर्वेद को वैश्विक बनाने के लिए रणनीतिक रोडमैप नाम से एक रिपोर्ट जारी की है।

इसमें कहा गया है कि सरकार को एक ग्लोबल आयुर्वेद रजिस्टर (जीएआर) बनाना चाहिए। इसके साथ ही पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को दुनिया भर में मान्यता दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में आयुर्वेद और योग के लिए एक विश्व महासंघ बनाने की सलाह दी है। आयोग चाहता है कि सरकार आयुर्वेदिक दवाओं के निर्यात के लिए एक विशेष मानक तैयार करे।

इसके अलावा, व्यापार पर नजर रखने के लिए एक रियल-टाइम आयुर्वेद ट्रेड डैशबोर्ड बनाने का भी सुझाव दिया गया है। आयोग ने आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए उद्योगों और शिक्षण संस्थानों के बीच तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया है।

भारत में आयुर्वेद एक अच्छी तरह से मान्यता प्राप्त और नियंत्रित चिकित्सा पद्धति है। देश में 3,55,000 से अधिक प्रशिक्षित आयुर्वेद डाक्टर हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी संख्या अभी कम है।

दुनिया भर के कुल योग्य आयुर्वेद पेशेवरों में से 95 प्रतिशत भारत में ही रहते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आयुर्वेद उत्पाद अब लगभग 150 देशों में भेजे जा रहे हैं। साल 2014 में इनका निर्यात 1.09 अरब डॉलर था, जो 2023 में बढ़कर 2.16 अरब डालर हो गया है।

आयुर्वेद के वैश्विक होने से आर्थिक अवसर बढ़ेंगे। इससे स्वास्थ्य उत्पादों के बाजार, वेलनेस सेवाओं और मेडिकल टूरिज्म में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है।

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