निजी कंपनी के दो कस्टोडियनों ने बैंक ऑफ बड़ौदा के एटीएम से उड़ाए करोड़ों रुपये

लखनऊ । अपराधी चाहे कितना शातिर हो, उसकी एक चूक उसे सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए काफी होती है। बहराइच में बैंक ऑफ बड़ौदा के एटीएम से करोड़ों रुपये चोरी करने वाले निजी कंपनी के दो कस्टोडियन के साथ ऐसा ही हुआ। एसटीएफ ने दोनों को गिरफ्तार कर 25.52 लाख रुपये बरामद किए हैं। एक अन्य की तलाश चल रही है।
बहराइच में बैंक ऑफ बड़ौदा के एटीएम में रुपये भरने का काम करने वाली सिक्योर वैल्यू इंडिया लिमिटेड कंपनी के तीन कर्मचारियों ने चोरी का गहरा षड्यंत्र रचा था। इनमें शामिल कंपनी के कस्टोडियन श्रवस्ती निवासी आशीष कुमार जायसवाल व फैजाबाद निवासी अंकुर श्रीवास्तव को एसटीएफ ने लखनऊ से गिरफ्तार किया है। एसएसपी एसटीएफ अभिषेक सिंह के अनुसार तीसरा कस्टोडियन धर्मेद्र हैं, जिसकी तलाश की जा रही है। दो कस्टोडियन मिलकर एटीएम का चेस्ट खोल सकते हैं। किस एटीएम में कितनी रकम भरी जानी है, इसका ब्योरा बैंक मेल के जरिये कंपनी में देता है। रकम भरने के दौरान आरोपित लाखों रुपये चोरी करते थे। इसके लिए एटीएम में लगे ईजे (इलेक्ट्रानिक जनरल) लॉग में छेड़छाड़ की जाती थी। दरअसल, ईजी लॉग में एटीएम से निकाली गई रकम का ब्योरा होता है।
आरोपित लॉग में डिस्पेंस अमाउंट बढ़ा देते थे और उतनी रकम चेस्ट से निकाल ली जाती थी। लेकिन, आरोपितों को यह नहीं पता था कि सॉफ्टवेयर की मजबूती के चलते लॉग में बदला गया डाटा बैंक के सर्वर में सेव नहीं होता था। यही वजह थी कि बैंक को घपले पर संदेह हो गया।
छह एटीएम के 35 लाख का किया था क्लेम
बैंक ने संदेह होने पर अपना हिसाब चेक किया और छह एटीएम में 35 लाख रुपये की रकम का क्लेम कंपनी को भेजा। यह गड़बड़ी 16 अक्टूबर को पकड़ में आई थी। तब लखनऊ के विभूतिखंड स्थित सिक्योर वैल्यू इंडिया कंपनी के शाखा प्रबंधक आशीष मिश्र ने इसकी शिकायत एसटीएफ से की और साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
18 एटीएम में किया घपला, इंजीनियर ने लीक किया पासवर्ड
सीओ प्रमेश कुमार शुक्ला ने बताया कि आरोपितों ने 18 एटीएम में गड़बड़ की। अन्य एटीएम से कितनी रकम निकाली गई, इसकी जांच चल रही है। एक करोड़ से अधिक की चोरी सामने आ चुकी है। एटीएम मशीन ठीक करने वाले इंजीनियर फैजल खां ने यूजर आइडी व पासवर्ड आरोपितों को दिया था। उसकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। आरोपितों ने चोरी की रकम गांव में मकान बनवाने की बात भी स्वीकार की है। रकम कहां निवेश की गई, इसकी जांच की जा रही है।





