धर्म चक्र दिवस पर देश को संबोधित करेंगे पीएम मोदी, जाने क्या है

जुबिली न्यूज़ डेस्क
आज आषाढ़ पूर्णिमा पूरे देश में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आज राष्ट्रपति भवन में धर्म चक्र दिवस का उद्घाटन करेंगे। राष्ट्रपति के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आषाढ़ पूर्णिमा के मौके पर देश को संबोधित करेंगे। इस वीडियो सन्देश के जरिये वो भगवान बुद्ध की आठ शिक्षाओं का जिक्र करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भगवान बुद्ध की शिक्षाओं और उनके द्वारा दिखाए गए आठ गुना पथ पर जोर देने के लिए इस अवसर पर एक वीडियो संबोधन देंगे। बाद में संस्कृति मंत्री प्रह्लाद पटेल और अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री किरेन रिजिजू भी उद्घाटन समारोह को संबोधित करेंगे
क्या है धर्म चक्र दिवस
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की देख रेख में अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ आषाढ़ पूर्णिमा को धर्म चक्र दिवस के रूप में मना रहा है। धर्म चक्र दिवस, उत्तर प्रदेश के वाराणसी के निकट वर्तमान सारनाथ में हिरण पार्क, रुपपटाना में अपने पहले पांच तपस्वी शिष्यों को बुद्ध के पहले उपदेश की याद दिलाता है।
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इसी मौके पर पूरी दुनिया के बौद्ध हर साल इसे धर्म चक्र प्रवर्तन दिवस के रूप में मनाते हैं। वहीं हिंदू धर्म में आज का दिन गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त करने का होता है और इसे ‘गुरु पूर्णिमा’ के रूप में भी मनाया जाता है।
पढ़ा जाएगा मंगोलिया के राष्ट्रपति का एक विशेष संबोधन
इस अवसर पर मंगोलिया के राष्ट्रपति का एक विशेष संबोधन भी पढ़ा जाएगा। साथ ही अब तक मंगोलिया में संरक्षित भारतीय मूल की बौद्ध पांडुलिपि भी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेंट की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक, आज के दिन कई अन्य महत्वपूर्ण आयोजन भी किये जाएंगे। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से शीर्ष बौद्ध धर्मगुरुओं, विशिष्ट जानकारों और विद्वानों के संदेशों को सारनाथ एवं बोधगया से प्रसारित किया जाएगा। हालांकि कोरोना वायरस के चलते ये सभी कार्यक्रम वर्चुअल होंगे। पूरी दुनिया के लगभग 30 लाख लोग आज लाइव वेबकास्ट के जरिए इनमें रूबरू होंगे।
इन जगहों पर लाइव होगा प्रार्थना समारोह
बुध पूíणमा के अवसर पर प्रार्थना समारोह को लाइव दिखाया जाएगा। ये समारोह पवित्र गार्डन लुम्बिनी, नेपाल, महाबोधि मंदिर, बोधगया, भारत, मूलगंध कुटी विहार, सारनाथ, भारत, परिनिर्वाण स्तूप, कुशीनगर, भारत, अनुराधापुरा स्तूप परिसर, श्रीलंका, बौधनाथ, स्वयंभू, नमो स्तूप, नेपाल के दूसरे लोकप्रिय बौद्ध स्थल पर किया जाएगा।





