दोषयुक्त गोमेद सुखों का नाश करता है

गोमेद राहु का रत्न माना गया है यानी इसका स्वामी राहु ग्रह है। विभिन्न भाषाओं में इसका भिन्न-भिन्न नाम है। संस्कृत में इसके गोमेदक, पिंग स्फटिक, राहु रत्न, हिन्दी में गोमेद, फारसी में जरकूनिया और अंग्रेजी में जिरकॉन कहते हैं। इसका रंग पीला सा गोमूत्र के समान होता है। इसके साथ ही यह श्यामला मिश्रित मधु की झांई की तरह दिखता है। यह आमतौर पर सिंधु नदी के किनारे, म्यांमार, चीन तथा अरब आदि देशों में पाया जाता है।

दोषयुक्त गोमेद: दोष्युक्त गोमद निष्प्रभावी नहीं होता बल्कि धारक के लिए हानिप्रद सिद्ध होता है। इसलिए ऐसे गोमेद को धारण करने से बचना चाहिए।

-जिस गोमेद रत्न में चमक न हो, यह खास तौर पर औरतों के लिए अहितकर और रोगवर्धक होता है।

-जिसका रंग लाल हो, यह विभिन्न रोगों को उत्पन्न करता है।

-जो रूक्ष अथवा सूखा हो, इससे समाज में मान-सम्मान कम होता है।

-जिसमें एक साथ कई रंग हों, यह धन नाशक होता है।

-जिसमें गड्ढा हो, इससे धन और मान प्रतिष्ठा का नाश होता है

-जिसमें किसी अन्य रंग का धब्बा हो, यह पशुधन नाशक होता है।

-जिसमें जाल जैसा हो, यह हर प्रकार के सुखों का नाश करता है।

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