दो साल में यूपी के इलाहाबाद का स्मार्ट सिटी बनना बड़ी चुनौती…

इलाहाबाद । स्मार्ट सिटी के तहत शहर के चयनित हिस्से का एरिया बेस्ड डेवलपमेंट (एबीडी) वर्ष 2019 तक करने का लक्ष्य है। लेकिन, इतनी कम अवधि में चिह्नित क्षेत्रफल का विकास कर पाना बड़ी चुनौती होगी। नगर निगम ने स्मार्ट सिटी के लिए जो प्रस्ताव केंद्रीय शहरी विकास मंत्रलय को सौंपा है उसके मुताबिक 2239 करोड़ रुपये की लागत से 1938 एकड़ क्षेत्रफल को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जाना है।
इसके लिए 2019 का लक्ष्य तय किया गया है। बहरहाल, किस महीने तक कार्य पूरे होंगे, इसका जिक्र नहीं है। हालांकि, स्मार्ट सिटी के लिए एडीए बोर्ड ने भी प्राधिकरण द्वारा करोड़ों रुपये खर्च करने का रास्ता साफ कर दिया है। लेकिन, नगर निगम प्रशासन इसको लेकर तेजी नहीं दिखा रहा है। न तो अभी इलाहाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड (एएसएसएल) और न ही स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) के गठन को लेकर कवायद शुरू हुई। जबकि इन कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी करने में काफी समय लगता है।
इसके बाद डिटेल्स प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार होगी। स्मार्ट सिटी के लिए जिन विभागों को कार्य करना है, वह एसपीवी का हिस्सा होंगे। वहीं, अगर इनका गठन तत्परता दिखाते हुए एक-दो महीने में कर भी लिया गया तो स्मार्ट सिटी के लिहाज से बहुमंजिली इमारतें, नाइट मार्केट, होटल आदि प्रस्ताव निर्धारित समय दो साल में कैसे पूरे हो पाएंगे। बहुमंजिली इमारतें दो-सवा दो साल में बनकर तैयार होना मुश्किल है।
एडीए उपाध्यक्ष भानु चंद्र गोस्वामी का कहना है कि क्या कार्य होने हैं। वह डीपीआर बनने के बाद फाइनल होगा। प्राधिकरण को स्मार्ट सिटी में अवस्थापना कार्यों को कराना है। इसके अलावा जो भी जिम्मेदारी विभाग को मिलेगी। उसे समय सीमा के अंदर पूरा किया जाएगा।
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पीपीपी मॉडल के कार्य भी बन सकते हैं रोड़ा: स्मार्ट सिटी के तहत तमाम कार्य पब्लिक प्राइवेट पार्टनर (पीपीपी) मॉडल पर कराने की योजना है। क्योंकि, केंद्र और प्रदेश सरकार से मिलाकर निगम को 1000 से 1200 करोड़ रुपये ही मिलने की उम्मीद है। अर्धकुंभ, अमृत, स्वच्छ भारत, नमामि गंगे समेत कई मद से भी निगम बजट जुटाएगा।
फिर भी करीब चार से पांच सौ करोड़ रुपये का कार्य पीपीपी मॉडल से कराने की योजना है। लेकिन प्राइवेट एजेंसियां बगैर अपना लाभ देखे कार्य कराने में दिलचस्पी नहीं लेंगी। ऐसे में पीपीपी मॉडल भी समय से कार्य पूरा होने में रोड़ा बन सकता है।





