देखना चाहते हैं वसंत पंचमी की असली धूम? इन 5 जगहों पर बनाएं घूमने का प्लान

वसंत पंचमी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भारत में वसंत ऋतु के आगमन का उत्सव है। यह पर्व प्रेम, रंगों और नए-पन का प्रतीक है। ज्ञान, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित इस दिन हर तरफ पीला रंग छाया रहता है- चाहे वह कपड़े हों, फूल हों या फिर भोजन ही क्यों न हो।

भारत के अलग-अलग हिस्सों में लोग इस फेस्टिवल को अपने अनोखे अंदाज से मनाते हैं। अगर आप 23 जनवरी को इस त्योहार का असली जादू देखना चाहते हैं, तो इन 5 जगहों (Best places to visit for Basant Panchami) की सैर जरूर करें।

जयपुर, राजस्थान
जयपुर में वसंत पंचमी का दूसरा नाम ही ‘पतंगबाजी’ है। इस दिन शहर का आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। सुबह से लेकर शाम तक लोग अपनी छतों पर जमा होते हैं, जहां संगीत बजता है और हंसी-ठिठोली का माहौल रहता है। मंदिर और महल रोशनी से जगमगा उठते हैं और बाजार पीले कपड़ों से सजे नजर आते हैं। जयपुर में इस त्योहार के दौरान एक अलग ही रौनक और उत्सव का अहसास होता है।

वृंदावन , उत्तर प्रदेश
वृंदावन में वसंत पंचमी का मतलब केवल वसंत ऋतु का स्वागत नहीं, बल्कि होली की शुरुआत है। यहां इस दिन से ही रंगों का उत्सव शुरू हो जाता है, जो अगले 40 दिनों तक चलता है। बांके बिहारी मंदिर में भगवान को पीले वस्त्र और फूलों से सजाया जाता है। सबसे खास बात यह है कि इस दिन ठाकुर जी को पहली बार गुलाल का टीका लगाया जाता है, जो ब्रज में होली के आगाज का प्रतीक है। इस दुर्लभ नजारे को देखने और पीले गेंदे के फूलों से सजे शहर का आनंद लेने के लिए देश-भर से भक्त यहां आते हैं।

वाराणसी, उत्तर प्रदेश
वाराणसी में वसंत पंचमी का अनुभव बेहद आध्यात्मिक होता है। यहां गंगा के घाट दीयों की रोशनी से चमक उठते हैं। पूरे शहर में, मंदिरों से लेकर स्कूलों और घरों तक में सरस्वती पूजा की जाती है। सुबह के समय नाव की सवारी करते हुए प्रार्थनाओं और मंत्रों की गूंज सुनना एक अद्भुत अनुभव है। काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन इस दिन को और खास बना देते हैं। यहां का माहौल पूरी तरह भक्तिमय होता है और कचौड़ी-सब्जी के साथ मलैया जैसे स्ट्रीट फूड सर्दी में गर्माहट और स्वाद घोल देते हैं।

कोलकाता, पश्चिम बंगाल
कोलकाता में वसंत पंचमी बहुत ही श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। यहां सरस्वती पूजा एक प्रमुख त्योहार है। स्कूल और कॉलेज देवी की मूर्तियों से सजाए जाते हैं। पीले कपड़े पहने युवा छात्र फूल और किताबें अर्पित करने के लिए इकट्ठा होते हैं और दिल से प्रार्थना करते हैं। शहर भर में सामुदायिक पंडाल लगाए जाते हैं। घरों में खिचड़ी, बेगुनी और संदेश जैसे विशेष पकवान बनाए जाते हैं। दक्षिणेश्वर और बेलूर मठ जैसे मंदिर दिन के समय बेहद शांत और आध्यात्मिक महसूस होते हैं।

पंजाब
वसंत पंचमी के दिन पंजाब का माहौल जोश और खुशी से भरा होता है। चारों तरफ सरसों के खेत चमकीले पीले रंग में खिले हुए नजर आते हैं। यहां भी पतंगबाजी एक मुख्य आकर्षण है। गांवों और शहरों में लोक संगीत और नृत्य की धूम होती है। लोग पीले कपड़े पहनते हैं और घर के बाहर उत्सव मनाते हैं। गुरुद्वारों में संगत का स्वागत प्रार्थनाओं के साथ किया जाता है। परिवार और दोस्तों के साथ पारंपरिक पंजाबी खाने का आनंद लिया जाता है, जो प्रकृति और समुदाय से जुड़ाव महसूस कराता है।

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