दिग्विजय का व्यवहार ही नहीं नीतियां भी खराब : जोशी

इंदौर। मध्यप्रदेश में दिग्विजय सरकार के दूसरे कार्यकाल में दिग्विजय सिंह का व्यवहार ही नहीं, नीतियां भी खराब हो गई थीं। इसीलिए प्रदेश में कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई। तब चुनाव के एक साल पहले उन्होंने शासकीय कर्मचारियों से पंगा ले लिया। ऐसा वही व्यक्ति कर सकता है जिसको अगली बार सरकार नहीं बनानी हो।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और स्व. इंदिरा गांधी जन्म शताब्दी समारोह समिति के संयोजक महेश जोशी ने रविवार को यह बेबाक बयान दिया। प्रेस क्लब में मीडिया से चर्चा में उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अरुण यादव को ही बनाए रखना चाहिए लेकिन सहयोग के लिए सभी बड़े कांग्रेस नेताओं को एक साथ मैदान में आना पड़ेगा।
सभी नेता एक साथ आ जाएं तो घर बैठे निराश कार्यकर्ताओं में नया उत्साह आ सकता है। अभी तो यह हो रहा है कि किसी को अध्यक्ष बनाया नहीं कि चौथे दिन से उसे बदलने की मुहिम शुरू हो जाती है।
यह तो केंद्र को सोचना है कि किसे रखना है, किसे हटाना है लेकिन जो बना है उसे काम तो करने दो। उन्होंने इस बात का भरपूर समर्थन किया कि राजस्थान में अशोक गेहलोत पर एक बार फिर पार्टी ने भरोसा जताकर ठीक किया। वहां इस बार कांग्रेस सत्ता में लौट रही है। उन्होंने बताया कि 8 मई को स्व. इंदिरा गांधी जन्म शताब्दी समारोह मनाया जाएगा। इस अवसर पर शहर के रिदम गार्डन में सम्मेलन रखा गया है।
गिनाई खूबियां
कांग्रेस नेता जोशी ने बेबाकी से बोलने के साथ ही पार्टी नेताओं की खूबियां भी गिनाईं। उन्होंने कहा कि संसाधन जुटाने में कमल नाथ जैसा नेता नहीं है तो ज्योतिरादित्य सिंधिया स्टार प्रचारक हैं। दिग्विजय सिंह के पास कार्यकर्ताओं की टीम है। उनके पास जिताऊ उम्मीदवार भी हैं। अरुण यादव अध्यक्ष बने रहें। ये सारे नेता एक साथ प्रदेश में काम करें तो कांग्रेस की सरकार बनना तय है।
खामियां भी बताई
व्यापमं इतना बड़ा कांड था जिस पर भाजपा सरकार का बिस्तर गोल हो सकता था लेकिन पार्टी इसे ठीक से भुना नहीं पाई। कांग्रेस के सभी बड़े नेता चाहते तो हैं कि पार्टी की सरकार बने लेकिन यह चाहते हैं कि मेरे नेतृत्व में बने। कांग्रेस की नीतियों में दलितों को प्राथमिकता रही। बाद में उन्हें जमीन के पट्टे बांटने में ध्यान नहीं रखा।
पद भले मत दो, काम तो करने दो
राजनीति में एक उम्र के बाद रिटायरमेंट के सवाल पर जोशी ने कहा कि उम्र के हिसाब से किसी बुजुर्ग नेता को पद मत दीजिए लेकिन जो पार्टी के लिए काम करना चाहते हैं उन्हें काम तो करने दो। किसी को काम करने से कैसे रोक सकते हैं।
राहुल गांधी भी 55 साल का फॉर्मूला लेकर आए लेकिन क्या हुआ? मोदीजी भी आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को काटना चाहते थे तो उम्र का फॉर्मूला लेकर आ गए। प्रदेश में बाबूलाल गौर और सरताज सिंह को बाहर करना था तो उम्र का हवाला देकर कर दिया।





