दाल में कुछ तो काला है! चंडीगढ़ पुलिस क्यों नहीं दे पाई इन 6 सवालों के जवाब

हाईप्रोफाइल मामले में जिस तेजी से पुलिस ने आरोपियों को काबू किया था, उतनी ही जल्दी वह अपनी खामियों की वजह से घिर गई है। पूरे देश में चंडीगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहा है। हर कोई सवाल पूछा रहा है कि आखिर चंडीगढ़ पुलिस ने दबाव में आकर क्यों कार्रवाई की?

1.बयानबाजी में जल्दबाजी
आरोपियों पर केस दर्ज करने से पहले पुलिस ने मीडिया में बयान दे दिया कि आरोपियों के खिलाफ किडनैपिंग करने की कोशिश की धारा लगाई जाएगी, लेकिन जब मामला दर्ज किया गया तो सिर्फ छेड़खानी की धारा लगाई गई।
2. कमजोर धारा लगाई
पीड़िता के बयान के बावजूद आरोपियों पर किडनैपिंग की कोशिश की धारा नहीं लगाई गई। आरोपियों पर सिर्फ छेड़खानी और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत धारा जोड़ी। सबसे पहले पुलिस पर सवाल यहीं से खड़े हुए।
3.थाने में आवभगत
घटना के दूसरे दिन सेक्टर-26 थाने में दिनभर कुछ पुलिसकर्मी कोल्डड्रिंक व फूड पैकेट की डिलीवरी करते पुलिसकर्मी दिखे। इस दौरान बीजेपी नेता, दोनों आरोपी भी थाने के अंदर थे। नेताओं की गाड़ी भी थाने के बाहर खड़ी थी। जिसकी फोटो वायरल होे के बाद पुलिस पर बीजेपी के दबाव का आरोप लगना तेज हो गया।
4. सीसीटीवी फुटेज का न मिलना
चंडीगढ़ स्मॉर्ट पुलिस का दावा करती है, लेकिन इस वारदात में इसका दावा खोखला साबित हुआ। सूत्रों के अनुसार वारदात वाले रूट पर छह में से चार सीसीटीव फुटेज खराब निकले, जबकि दो अन्य में कुछ भी सामने नहीं आया। बाद में प्राइवेट सीसीटीवी कैमरे से फुटेज मिली।
5. प्रेस कांफ्रेंस छोड़कर भागे एसएसपी
चारों तरफ सवाल उठने के बाद सोमवार शाम एसएसपी डा. ईश सिंघल ने प्रेस कांफ्रेंस बुलाई। एसएसपी 10 मिनट भी मीडियाकर्मियों के सवालों का सामना नहीं कर पाए और बीच में ही प्रेस कांफ्रेंस छोड़कर चले गए।
6. अब तक नहीं ले पाए कानूनी राय
इस पूरे मामले में रविवार को ही पुलिस ने कह दिया था कि वह इस मामले में आरोपियों के खिलाफ अपहरण की कोशिश की धारा लगाने के मामले में कानूनी राय ले रहे हैं। लेकिन दो दिन बीत गए है अब तक चंडीगढ़ पुलिस कानूनी राय नहीं ले पाई।





