जानिये क्यों मनाई जाती है ईद और कैसे हुई थी इसकी शुरुआत , ईद पर नमाज पढ़ता बच्चा-बच्चा

इस्लाम धर्म का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार ईद है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार नवां महीना को सबसे पवित्र माना जाता है। इस महीने में पूरे दिन बिना कुछ खाएं रहने के बाद शाम को रोजा खोलते हैं। एक महीना पूरे होने के बाद जो चांद नजर आता है, उसे ईद का चांद कहते हैं।
इस ईद को लोग मीठी ईद या सेवईयों वाली ईद भी कहते हैं।

इस साल ईद का त्योहार 5 जून को मनाया जाएगा। ईद के दिन लोग अपनी पुरानी दुश्मनी भूलाकर एक-दूसरे से गले मिलते हैं। बच्चे, बूढ़े सभी खुश नजर आते हैं। आइए जानते हैं आखिर इस त्योहार की शुरुआत कैसे हुई।

इस्लाम धर्म का पवित्र किताब कुरान शरीफ के मुताबिक रमजान के पूरे महीने रोजे रखने के बाद अल्लाह एक दिन अपने बंदों को खुशियां मनाने के लिए देते हैं। इसलिए इस खास दिन को ईद कहते हैं। ईद के त्योहार को पूरे विश्वभर में हर्षो उल्लास के साथ मनाया जाता है।
मुस्लिम लोग खुदा का शुक्रिया इसलिए करते हैं क्योंकि अल्लाह उन्हें महीने भर उपवास रहने की ताकत देते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि रमजान के पवित्र महीने में दान करने से उसका फल दोगुना मिलता है। ऐसे में लोग गरीब और जरूरतमंदों के लिए कुछ रकम दान कर देते हैं।
पहली ईद मुहम्मद पैगंबर ने साल 624 में जंग जीतने के खुशी में मनाई थी। पैगंबर हजरत बद्र के युद्ध में विजयी प्राप्त की थी। ईद के दिन सुबह नमाज अदा करने के बाद कुछ दान दिया जाता है। इस दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं और अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से गले मिलते हैं।
रमजान महीने में रोजा रखने का मतलब होता है कि लोगों को भूख प्यास का एहसास हो सके। इस दिन कई तरह के पकवान घर में बनाएं जाते हैं। इस दिन मीठी सेवइयां घर पर आए मेहमानों को खिलाया जाता है। घर आए मेहमानों की विदाई कुछ उपहार देकर की जाती है।





