जानिए भारत में कैसे आये लजीज और हर उम्र के लोगो की पसंद मोमोज ?

मोमोज भारत में बेहद लोकप्रिय डिश है। वेज हो या फिर नॉन-वेज, मोमोज को लेकर हर उम्र के लोगों का प्यार देखने लायक होता है। यह एक ऐसी डिश है जो रेहड़ी-पटरी ही नहीं बल्कि व्यस्त बाजारों, ऑफिसों और मॉल, हर जगह आपको मिल जाएगी। स्ट्रीट फूड्स के तौर पर तो मोमोज का क्रेज ही कुछ और है। स्कूल और कॉलेजों के बाहर भी आप मोमोज प्रेम से रूबरू हो ही जाएंगे। लेकिन क्या आपको पता है कि मोमोज भारतीय व्यंजन नहीं है। यह विदेशी व्यंजन है जिसने भारत तक पहुंचने में लंबा सफर तय किया है। दिल्ली में कई जगह तो घर-घर मोमोज बनते हैं और उसके बाद रेहड़ी-पटरी वाले इन्हें खरीदते हैं, फिर अलग-अलग जगह साइकिल या स्टॉल पर इन मोमोज को बेचा जाता है।

आइए आपके लजीज, जायकेदार और चटपटे मोमोज के बारे में कुछ रोचक बातें जानते हैं…
मोमोज तिब्बत की डिश है। यह चीन के मालपुए जैसी डिश से प्रभावित है। नेपाल के रास्ते मोमोज की डिश भारत पहुंची। उत्तर पूर्वी राज्यों से होते हुए शहरों में मोमोज ने अपनी धाक जमाई और सबसे लोकप्रिय स्ट्रीट फूड की कतार में शामिल हो गई। पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड और हिमाचल में भी मोमोज की बेहद लोकप्रियता है। कहा जाता है कि मोमोज मूल रूप से तिब्बत की डिश है जिस पर चीन का प्रभाव है। मोमोज का अर्थ ही होता है- भांप में पकाई गई रोटी।

यह भी कहा जाता है कि मोमोज की डिश सबसे पहले तिब्बत के लहासा में बनी। इसके बाद इस डिश की सामग्री बदलती रही। तिब्बत से मोमोज नेपाल गए तो बनाने की विधि और सामग्री थोड़ा अलग हो गई। ऑक्सफॉर्ड डिक्शनरी में मोमोज का अर्थ- भांप में बनी तिब्बती डिश बताया गया है जो कि मांस और सब्जियों को मिलाकर तैयार की जाती है। नेपाल में मोमोज व्यंजन सबसे पहले काठमांडु में मिलने शुरू हुए।

माना जाता है कि तिब्बत के व्यापारी वहां से इस डिश को काठमांडु में लाए। हालांकि, मोमोज डिश की उत्पत्ति को लेकर सटीक जानकारी मिलना थोड़ा मुश्किल है। दरअसल, तिब्बत की संस्कृति और खान-पान पर चीन और मंगोल प्रभाव रहा है, ऐसे में यह कहा जाता है कि मोमोज भी चीन से ही तिब्बत आए। जबकि मालपुए विशुद्ध रूप से भारतीय डिश है। इसका मोमोज से कोई संबंध नहीं है। दोनों ही व्यंजनों के बनाने की विधि भी अलग है। भारत में मालपुए अक्सर त्योहारों के मौके पर बनाए जाते हैं।

आइए मोमोज के बारे में कुछ रोचक बातें जानते हैं…
मोमोज की डिश को भांप में बनाया जाता है। तिब्बज में यह डिश सबसे ज्यादा खाई जाती है। शिलांग में मोमोज मांस में तैयार किए जाते हैं। शिलांग के मोमोज काफी प्रसिद्ध भी हैं। शिलांग के अलावा अरुणाचल में भी मोमोज काफी लोकप्रिय हैं। यहां इस डिश को चाव से खाया जाता है। यहां इसमें सरसों की पत्तियां व दूसरे सब्जियों के साथ बनाया जाता है ताकि यह स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सके।
चीन में मोमोज को डिमसिम कहा जाता है। यहां इसे मांस के साथ ही दूसरी सब्जियों के साथ बनाया जाता है। यानी की मोमोज के अंदर ये चीजें भरी जाती हैं।इसके अलावा इनदिनों भांप के अलावा तेल में तले हुए मोमोज खाने का चलन भी बढ़ रहा है। दिल्ली और दूसरे शहरों में फ्राई मोमोज का चलन बढ़ा है।





