जयपुर: छात्रसंघ चुनाव लड़ने की योग्यता के लिए किसी एक यूनिवर्सिटी से यूजी करके दूसरी यूनिवर्सिटी से पीजी कर रहे छात्र या एक साल से नियमित विद्यार्थी होने के नियम पर राज्य सरकार ने रोक लगा दी है। जोधपुर हाईकोर्ट द्वारा इस नियम पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद राज्य सरकार ने ये कदम उठाया है। इस संबंध में सोमवार को उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी ने सभी विश्वविद्यालयों को दिशा-निर्देश जारी किए है। माहेश्वरी ने बताया कि छात्रसंघ चुनावों को बेहतर बनाने के लिए नियम- कायदों में संशोधन किए गए थे।
– इनमें से एक नियम ये था कि किसी एक यूनिवर्सिटी से यूजी करने वाला विद्यार्थी किसी दूसरी यूनिवर्सिटी में पीजी करते हुए छात्रसंघ अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ सकता था। इसी नियम पर जोधपुर हाईकोर्ट ने स्टे दिया है। – ऐसे में सभी यूनिवर्सिटी को दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि ये नियम लागू नहीं रखे जाएं। उधर राजस्थान यूनिवर्सिटी सहित प्रदेशभर की सभी सरकारी यूनिवर्सिटी ने इस नियम को खत्म कर दिया है।
– गौरतलब है कि इस नियम को लेकर राजस्थान यूनिवर्सिटी, जोधपुर की जय नारायण व्यास यूनिवर्सिटी सहित कई विश्वविद्यालयों में विरोध- प्रदर्शन चल रहे थे।
– एनएसयूआई आरोप लगा चुकी है कि इस नियम से उनके उम्मीदवार प्रभावित हो रहे थे। इसके विरोध में एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष फिरोज खान दो दिन से जयपुर में है और प्रदेशाध्यक्ष सहित समस्त कार्यकारिणी के साथ रोजाना प्रदर्शन करवा रहे थे ।
ऐसे बना इस निर्णय का आधार
– जोधपुर हाईकोर्ट ने जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर सहित प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र संघों में अध्यक्ष पद के चुनाव में एक साल से नियमित विद्यार्थी होने की शर्त को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं को विचारार्थ स्वीकार करते हुए उस पर अंतरिम रोक लगा दी तथा ऐसे विद्यार्थियों के नामांकन खारिज नहीं करने के आदेश दिए हैं।
– याचिकाकर्ता कांता ग्वाला, अनुजा विश्नोई, वीरेंद्र प्रताप सिंह व लोकेंद्र पाल सिंह व अन्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेंद्र सिंह सिंघवी, अधिवक्ता बलजिंदर सिंह संधू, अखिलेश राजपुरोहित, महावीर सिंह व नीहार जैन आदि ने रिट याचिका दायर कर कोर्ट को बताया कि गत 24 जुलाई 2017 को राज्य सरकार ने छात्र संघ चुनाव को लेकर एक गाइड लाइन जारी की।
– इसके बिंदु संख्या 7 में अध्यक्ष सहित विभिन्न पदों के लिए चुनाव लड़ने के लिए दावेदार का नियमित विद्यार्थी होने तथा 75 प्रतिशत उपस्थिति होना अनिवार्य किया गया है, लेकिन इससे कुछ स्पष्ट नहीं हो रहा था। दावेदार भी निश्चिंत थे कि वे चुनाव के योग्य है, लेकिन राज्य सरकार ने 16 अगस्त को चुनाव की घोषणा करते समय बिंदु संख्या 7 को स्पष्ट किया कि नियमित विद्यार्थी से तात्पर्य यह है कि विद्यार्थी का एक साल से विश्वविद्यालय में प्रवेश होना जरूरी है यानि वे पिछले एक साल से स्टूडेंट होना चाहिए।