चैत्र नवरात्र के सातवें दिन ऐसे करें मां कालरात्रि की आरती

चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2026) का पावन पर्व अब अपने सातवें पड़ाव पर पहुंच चुका है। आज चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है, जो आदिशक्ति के सबसे शक्तिशाली और निर्भीक स्वरूप ‘मां कालरात्रि’ को समर्पित है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब असुर रक्तबीज का आतंक बढ़ गया था, तब उसका संहार करने के लिए मां कालरात्रि प्रकट हुई थीं। मां का स्वरूप अद्भुत और तेजस्वी है, उनका वर्ण गहरे काले रंग का है, जिसके कारण उन्हें ‘कालरात्रि’ पुकारा जाता है। उनकी चार भुजाएं और बिखरे हुए बाल उनकी शक्ति का प्रतीक हैं।

मां कालरात्रि की स्तुति
या देवी सर्वभू‍तेषु मां कालरात्रि रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मां कालरात्रि की प्रार्थना

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।

लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥

वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा।

वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

मां कालरात्रि बीज मंत्र
क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:।

मंत्र

  1. ज्वाला कराल अति उग्रम शेषा सुर सूदनम।

त्रिशूलम पातु नो भीते भद्रकाली नमोस्तुते।।

  1. ओम देवी कालरात्र्यै नमः।

मां कालरात्रि की आरती/Maa Kalratri Ki Aarti
कालरात्रि जय-जय-महाकाली।

काल के मुह से बचाने वाली।

दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा।

महाचंडी तेरा अवतार।

पृथ्वी और आकाश पे सारा।

महाकाली है तेरा पसारा।

खड्ग खप्पर रखने वाली।

दुष्टों का लहू चखने वाली।

कलकत्ता स्थान तुम्हारा।

सब जगह देखूं तेरा नजारा।

सभी देवता सब नर-नारी।

गावें स्तुति सभी तुम्हारी।

रक्तदंता और अन्नपूर्णा।

कृपा करे तो कोई भी दुःख ना।

ना कोई चिंता रहे बीमारी।

ना कोई गम ना संकट भारी।

उस पर कभी कष्ट ना आवें।

महाकाली मां जिसे बचावे।

तू भी भक्त प्रेम से कह।

कालरात्रि मां तेरी जय।

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