गलत तरीके से इंश्योरेंस या म्यूचुअल फंड बेचे, तो बैंकों होंगे…

पहली बार बैंकों को थर्ड पार्टी प्रोडक्ट जैसे बीमा पॉलिसियों या म्युचुअल फंड योजनाओं को गलत तरीके से बेचने के लिए जवाबदेह बनाया गया है। मोबाइल और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं की समस्याओं के लिए भी ग्राहक बैंकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

गलत तरीके से इंश्योरेंस या म्यूचुअल फंड बेचे, तो बैंकों होंगे...

आरबीआई ने शुक्रवार को कहा कि उसने बैंकिंग ओम्बड्समैन स्कीम 2006 को और विस्तृत किया है। इसमें ऋणदाताओं द्वारा थर्ड पार्टी इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स की बिक्री में होने वाली कमियों को भी शामिल किया गया है। संशोधित योजना के तहत ग्राहक मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग सेवाओं के संबंध में आरबीआई के निर्देशों का पालन न करने वाले बैंकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकता है।

संशोधन के बाद ओम्बड्समैन के पास मुआवजा देने का अधिकार दोगुना बढ़कर 10 लाख से 20 लाख रुपए तक हो गया है। लोकपाल को समय की बर्बादी, खर्चे, शोषण और मानसिक पीड़ा का शिकार शिकायतकर्ता को एक लाख रुपए से ज्यादा नहीं मुआवजा देने का अधिकार दिया गया है। ग्राहकों को बंद कर दी गई शिकायतों के संबंध में अपील करने का भी विकल्प दिया गया है, जो पहले उपलब्ध नहीं था।

अब तक, अगर बीमा पॉलिसी या म्यूचुअल फंड के खरीदार को गलत तरीके से कोई उत्पाद बेचा गया होता था, तो उसके निपटारे के लिए उसे बीमा कंपनी या म्यूचुअल फंड कंपनी से निपटना होता था। उदाहरण के लिए, पिछले साल ब्रिटेन के चार सबसे बड़े बैंक बार्कलेज, एचएसबीसी, लॉयड्स और आरबीएस पर गलत तरीके से पेमेंट प्रोटेक्शन इंश्योरेंस बेचने के लिए भारी जुर्माना लगाया गया था।

भारत में 20 लोकपाल हैं, जिनमें से प्रत्येक के पास क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार है। पीड़ित ग्राहक ई-मेल या पोस्ट के माध्यम से ओम्बड्समैन में अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। हालांकि, लोकपाल के साथ शिकायत दर्ज करने से पहले ग्राहक को बैंक के ग्रीवेंस रिड्रेसल डिपार्टमेंट (शिकायत निवारण विभाग) से संपर्क करना होगा और जवाब के लिए 30 दिन इंतजार करना होगा।

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अदालतों के विपरीत इसके लिए शिकायतकर्ता को कोई शुल्क नहीं देना होगा। हालांकि, ओम्बड्समैन पीड़ित की शिकायत सुनने से इंकार कर सकता है यदि यह शिकायत पहले ही किसी अन्य अदालत में सुनी जा चुकी हो। वित्त वर्ष 2016 में बैंकिंग ओम्बड्समैन के कार्यालय में 1.03 लाख शिकायतें की गई थीं।

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