गन्ने की FRP बढ़ते ही शुरू हुई इथेनॉल की कीमत बढ़ाने की मांग

03 मई को केंद्रीय कैबिनेट ने गन्ना किसानों को राहत देते हुए गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) में बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी के बाद कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) ने गन्ने से बने इथेनॉल की कीमतों में संशोधन करने और चीनी के लिए डुअल प्राइसिंग सिस्टम पर विचार करने की सिफारिश की है।
CACP ने क्या सिफारिश की?
आयोग का कहना है कि पिछले पांच सालों में गन्ने के FRP और अनाज आधारित इथेनॉल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन गन्ने से बनने वाले इथेनॉल की कीमतों में उतनी बढ़ोतरी नहीं हुई, जिससे चीनी मिलों पर दबाव बढ़ा है। गन्ने के रस, चीनी, चाशनी और बी-हैवी शीरे से बनने वाले इथेनॉल की कीमत में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई और उनकी कीमत लगभर स्थिर रहीं। इसी वजह से CACP ने इथेनॉल की कीमत बढ़ाने की सिफारिश की है।
चीनी के अलग-अलग दामों की सिफारिश
गन्ना आधारित इथेनॉल की कीमत में बढ़ोतरी के अलावा, आयोग ने सुझाव दिया कि देश में कुल चीनी उत्पादन का लगभग 60-65 फीसदी उपयोग औद्योगिक और कॉमर्शियल क्षेत्रों में होता है, जबकि बाकी घरेलू उपभोक्ता इस्तेमाल करते हैं। इसलिए इन उपभोक्ताओं के लिए अलग मूल्य निर्धारण (Dual Pricing System) की संभावना पर भी विचार किया जाना चाहिए। कई राज्य सरकारों और उद्योग संगठनों ने भी इस नीति का समर्थन किया है।
तेजी से बंद हुईं चीनी मीलें
CACP ने अपनी सिफारिश में ये जानकारी भी दी है कि पिछले एक दशक में भारतीय चीनी उद्योग ने इथेनॉल की उत्पादन क्षमता को बढ़ाया है जबकि इसके उलट गन्ने की उपलब्धता और बाजार मांग में उस अनुपात के अनुसार इजाफा नहीं हुआ है, इससे क्षमता उपयोग घटा है और साल 2024-25 सीजन में 30 फीसदी से अधिक चीनी मिलें बंद हो गईं।
उच्च स्तरीय समिति बनाने की मांग
इस समस्या पर गंभीर होते हुए कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) ने सिफारिश की कि केंद्र और राज्य सरकारों, उद्योग, शिक्षाविदों और किसानों के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति बनाई जाए। यह समिति गन्ने के क्षेत्र निर्धारण, मिलों के बीच न्यूनतम दूरी के नियम, राजस्व बंटवारे और दोहरी कीमत व्यवस्था जैसे मुद्दों की समीक्षा करेगी।





