क्या प्रज्ञा ठाकुर के शहीद करकरे पर बयान के कारण आईपीएस रूपा ने ठुकराया मोदी सरकार का अवार्ड?

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट वायरल हो रही है। इस पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि कर्नाटक की आईपीएस रूपा ने मोदी सरकार के अवॉर्ड को लेने से मना कर दिया है क्योंकि भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने शहीद हेमंत करकरे का अपमान किया था। हालांकि, इस पोस्ट में प्रज्ञा ठाकुर का नाम तो नहीं लिखा है लेकिन उन्होंने प्रचार के दौरान हेमंत करकरे को लेकर विवादित बयान दिया था। इस पोस्ट के साथ आईपीएस रूपा की फोटो भी लगाई गई है और अवॉर्ड लेने से मना करने पर उनकी तारीफ की जा रही है।
- कर्नाटक की आईपीएएस रूपा ने मोदी सरकार का अवॉर्ड लेने से मना कर दिया, क्योंकि प्रज्ञा ठाकुर ने हेमंत करकरे का अपमान किया था
- आईपीएस रूपा ने खुद इसको झूठा बताया है, साथ ही ये भी कहा है कि सरकार की तरफ से इस तरह का कोई अवॉर्ड दिया ही नहीं जाता
क्या वायरल?
फेसबुक, ट्वीटर पर आईपीएस रूपा के अवॉर्ड नहीं लेने की खबर फैलाई जा रही है। इस पोस्ट में लिखा है, “आईपीएस रूपा यादव जी ने मोदी सरकार से अवॉर्ड लेने से मना कर दिया है। बोली मेरा जमीर इजाजत नहीं देता कि हमारे देश के शहीद हेमंत करकरे जिन्हें वीरता का सर्वोच्च सम्मान मिला है, को भाजपा की नवनिर्वाचित जो आतंकवाद की आरोपी है वो करकरे जी को देशद्रोही और गद्दार और गालियां देती हैं और उसकी पार्टी यहां मुझे अवॉर्ड देकर ढोंग कर रही। सैल्युट तो बनता है भाईयों।”
क्यों फेक?
- इस पोस्ट पर जवाब देते हुए आईपीएस रूपा ने खुद इसे झूठा बताया है। उन्होंने ट्वीटर पर लिखा, “पुलिसकर्मियों के लिए इस तरह का कोई अवॉर्ड नहीं होता। हमें राष्ट्रपति पुलिस पदक मिलता है। मेरे पास राष्ट्रपति पुलिस पदक है जो मुझे मेधावी सेवा के लिए मिला था। इस पोस्ट में फोटो तो मेरी है लेकिन सरनेम गलत है।”
- कर्नाटक की आईपीएस रूपा इस वक्त रेलवे में पुलिस महानिदेशक हैं। उनका पूरा नाम रूपा दिवाकर मुदगिल है।
कौन हैं आईपीएस रूपा?
आईपीएस रूपा कर्नाटक की पहली महिला आईपीएस अधिकारी हैं। उनका जन्म कर्नाटक के देवनागिरी में हुआ था। उन्होंने कर्नाटक की कुवेंपु यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया और बैंगलुरु यूनिवर्सिटी से साइकोलॉजी में एमए की पढ़ाई की है। उन्होंने 2000 में यूपीएससी परीक्षा में 43वीं रैंक हासिल की थी। उन्होंने 2003 में आईएएस अधिकारी मुनिश मुदगिल से शादी की थी। उन्होंने दो बार- 2016 और 2017 में राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया जा चुका है।
हेमंत करकरे को लेकर प्रज्ञा ने क्या दिया था बयान?
अप्रैल 2019 में भोपाल में मीडिया से बात करते हुए प्रज्ञा ठाकुर ने कहा था, “एटीएस मुझे 10 अक्टूबर 2008 को सूरत से मुंबई लेकर गई थी। वहां 13 दिन तक मुझे बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान एटीएस ने मुझे दिन रात टार्चर किया। ये सब उस वक्त के एटीएस चीफ हेमंत करकरे के इशारे पर होता था। इसलिए उन्हें संन्यासियों का श्राप लगा और मेरे जेल जाने के करीब 45 दिन बाद ही वह 26/11 के मुंबई आतंकी हमले का शिकार हो गए।”





