कुंडली में कब और कैसे बनता है कालसर्प दोष?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष होने से धन से जुड़ी समस्या और विवाह में देरी या वैवाहिक कलह का सामना करना पड़ सकता है। इस दोष से बचने के लिए ज्योतिष शास्त्र में उपाय बताए गए हैं।
ऐसा माना जाता है कि उपायों की मदद से इस दोष को दूर किया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुंडली में कालसर्प दोष कब बनता है और इससे कौन से संकेत मिलते हैं। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए इस लेख में आपको बताते हैं इसके बारे में विस्तार से।
कब बनता है कालसर्प दोष
ज्योतिष गणना के अनुसार, जब व्यक्ति की कुंडली में केतु और राहु के बीच सभी ग्रह आ जाते हैं, तो ऐसी स्थिति में कालसर्प दोष का निर्माण होता है। इस दोष से बचने के लिए व्यक्ति को किसी विद्वान ज्योतिष की सलाह लेनी चाहिए।
कालसर्प दोष के संकेत
ऐसा माना जाता है कि जब व्यक्ति को सपने में मृत लोग दिखाई देते हैं, तो ऐसे में कुंडली में कालसर्प दोष होने का भय रहता है।
इसके अलावा जीवन में अधिक मेहनत करने के बाद भी अगर सफलता प्राप्त नहीं हो रही है, तो इसकी वजह कुंडली में कालसर्प दोष हो सकता है।
अगर आप मानसिक और शारीरिक रूप से समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तो कुंडली में भी कालसर्प दोष हो सकता है। इस दोष के होने से सिरदर्द और त्वचा रोग से जुड़ी समस्या हो सकती है।
कुंडली में कालसर्प दोष होने से पैसा हाथ में न टिकना और जीवन में कर्ज की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
कालसर्प दोष के उपाय
कालसर्प दोष से छुटकारा पाने के लिए भगवान शिव की पूजा-अर्चना फलदायी मानी जाती है। रोजाना शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से कालसर्प दोष दूर होता है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही महादेव की कृपा बरसती है।
इसके अलावा सावन के महीने में शिवलिंग पर चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा अर्पित करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से कालसर्प दोष की समस्या दूर होती है और महादेव की कृपा से बिगड़े काम पूरे होते हैं।
कुंडली में कालसर्प दोष को दूर करने के लिए गोमेद रत्न लाभकारी माना जाता है। रत्न शास्त्र के अनुसार, गोमेद रत्न को धारण करने से रुके हुए काम पूरे होते हैं और करियर की बाधा दूर होती हैं, क्योंकि इस रत्न का संबंध राहु से है। इस रत्न को धारण करने के लिए शनिवार का दिन शुभ माना जाता है।





