किडनी कांड में आरोपियों को लेकर हुआ चौंकाने वाला खुलासा, अब सामने आया इस बड़े कारोबारी का नाम

किडनी कांड की जांच में रायबरेली के बछरावां कस्बे के एक बड़े कारोबारी का नाम सामने आया है। कारोबारी ने लखनऊ के एक डोनर से किडनी खरीदी थी। पुलिस कारोबारी और डोनर के बारे में जानकारी जुटा रही है।किडनी कांड में आरोपियों को लेकर हुआ चौंकाने वाला खुलासा, अब सामने आया इस बड़े कारोबारी का नाम

पुलिस ने लखनऊ निवासी वरदान और शीबू उर्फ शोएब को गवाह बनाया है। गिरोह से जुड़े तीन और लोग लखनऊ के हैं। इसमें राजा, रईस और आनंद कुमार शामिल हैं। 

एसआईटी में शामिल एक जांच अधिकारी के मुताबिक इन सभी लोगों के संपर्क में एक और डोनर कादिर भी था। कादिर ने बछरावां निवासी एक बड़े कारोबारी को उसका रिश्तेदार बन किडनी बेची थी। पुलिस कादिर को तलाश रही है। उसको पकड़ने के बाद कारोबारी तक पहुंचेगी।

नाम असली है या बदला हुआ, स्पष्ट नहीं 
जांच अधिकारी के मुताबिक यह पूरी जानकारी किडनी डोनरों ने दी है। उसी आधार पर जांच की जा रही है। चूंकि सभी डोनर रिसीवर का रिश्तेदार बनकर किडनी बेचते थे। उसमें उनके असली नाम भी बदले जाते थे।

इसलिए अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि डोनर का असली नाम कादिर है या फिर उसने कादिर बनकर किडनी दी थी। पुलिस को कादिर के दो मोबाइल नंबर मिले हैं, जो अभी बंद हैं। पुलिस इनकी नंबरों की मदद से उस तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है। 

डोनरों ने इनको बेची थी किडनी, सभी पर होगी कार्रवाई
डोनर शोएब अली ने संस्कार अग्रवाल बनकर बुलंदशहर निवासी अनिल अग्रवाल को किडनी दी थी। इसमें संस्कार को रिश्ते में अनिल का बेटा बनाया गया था। वरदान ने अजीत गुप्ता बनकर दिल्ली के मधुकर गोयल को किडनी दी थी। 

यहां वरदान को मधुकर का भतीजा बनाया गया था। लखनऊ के रईस ने दिल्ली के चौहान को लिवर बेचा था। हालांकि उसकी मौत हो गई थी। पुलिस ने चौहान के रिश्तेदार से पूछताछ की है। इन सभी के साथ अन्य सभी रिसीवरों पर भी कार्रवाई होगी।

 पुलिस के अनुसार इन सभी रिसीवरों ने रिश्तेदार होने का फर्जी शपथ पत्र दिया। पैसों के दम पर किडनी व लिवर खरीदे और ट्रांसप्लांट करवाए। इसलिए पुलिस इन सभी को सीधे आरोपी बना सकती है।  

पांच टीमें कर रहीं जांच

एसआईटी की निगरानी कर रही हैं एसपी साउथ रवीना त्यागी ने मामले में बैठक की। पांच टीमें गठित की गई हैं। दो टीमों को आरोपियों की गिरफ्तारी में लगाया गया है। एक को दस्तावेज सत्यापन की जिम्मेदारी दी गई है वहीं अन्य दो टीमें जिन-जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उनको उठाकर पूछताछ करेंगी।
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