कानपुर: रहस्य बन गयी संजीत की हत्या, 30 लाख का भी सुराग नहीं

कानपुर। शहर का संजीत हत्याकांड को हुए तीन माह बीत चुके है, लेकिन पुलिस पहले भी जहां खडी थी आज भी वहीं खडी है। छानबीन के नाम पर पुलिस ने लगभग सारी ताकत लगा ली, लेकिन कुछ सफलता हाथ न लगी। संजीत का शव व तीस लाख रूपये भरा बैग का रहस्य खूलने का नाम नहीं ले रहा है। धीरे-धीरे यह घटनाक्रम दिल्ली का चर्चित आरूषि हत्याकांड बनता जा रहा है।
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शहर का संजीत हत्याकांड पुलिस-प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। 22 जून को नौबस्ता से संजीत का अपहरण हुआ था। खोजबीन के बाद भी न मिलने पर परिजनों ने हताश होकर 23 जून को स्थानीय थाना बर्रा में गुमशदगी की रिपोर्ट दर्ज करायी। सूचना पर पुलिस ने मामलों को गंभीरता से लेते हुए छानबीन शुरू कर दी, अभी जांच चल ही रही थी कि 29 जून को पिता के पास फिरौती के लिए फोन आया। अपहरणकर्ताओं ने तीस लाख की डिमांड रखी। बेटे की जान बचाने के लिए परिजनों ने पैसे का इंतजाम करके पुलिस की उपस्थित में बैग गुजैनी के पास हाइवे-पुल से नीचे फेंका, पैसा भी चला गया लेकिन संजीत घर वापस नहीं आया।
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घटना को तूल पकडते देख कप्तान ने पहले इस्पेक्टर बर्रा रणजीत राय को हटाया और केस की कमान क्राइम ब्रांच को दी। टीम ने तेजी से काम करते हुए चार अभियुक्तों को दबोचा और तभी पूछताछ में पता चला कि संजीत की हत्या हो गयी है। हत्या की सूचना जैसे ही बडे अधिकारियो तक पहुंची वैसे ही बडी कार्यवाही करके एसपी साउथ सहित दस लोगों को सस्पेंड कर दिया गया। पकडे गये अपराधियों के पूछताछ के आधार पर जांच आगे बढने लगी अनेक अन्य नयी जानकारियां आयी लेकिन परिणाम जीरो ही रहा। अभियुक्त भले जी जेल में है। लेकिन अभी तक हत्या की गुत्थी सुलझ नहीं पायी है। शव व नोटों का बैग अभी तक पुलिस खोज नहीं पायी है। गुजरते समय के साथ यह केस उलझता ही जा रहा है। 75 दिनों बाद भी संजीत का परिवार आज भी वहीं खडा है जहां 22 जून को घटना के पहले दिन खडा था।
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