कानपुर: पितृपक्ष के पहले दिन गंगा घाटों पर लोगों ने किया अपने पितरों का पिण्ड दान

कानपुर। बुधवार को पितृपक्ष की शुरूआत हो। पहले दिन पूर्णिमा का श्राद्ध व तर्पण सनातन धर्मियों ने किया और अपने-अपने पुरखों की पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की प्रार्थना की। इस बीच सोशल डिस्टेंडिंग का भी पूरा पालन किया गया। कोरोना संक्रमण के भय से काफी श्रद्धालुओं ने अपने घरों में ही श्राद्ध व तर्पण कर लिया। पितृ पक्ष आज 2 से 17 सितंबर तक चलेगा। पितृपक्ष पर शहर के गंगा किनारे घाट मैस्कर,गोला, सरसैया, परमट मेगजीन व गंगा बैराज आदि घाटों पर आज लोगों ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शान्ति के लिए पिण्डदान व तर्पण किया।
हिंदू समुदाय इस15 दिन पिंडदान के साथ ही ब्राह्मण को भोजन, तर्पण के अलावा गरीबों को दान कर अपने पूर्वजों को श्रद्धांजिल अर्पित की जाती है। विधिनुसार पितरों का तर्पण न किया जाये तो उन्हें मुक्ति नहीं मिलती और उनकी आत्मा मृत्युलोक में भटकती रहती है। पितृ पक्ष को मनाने का ज्योतिषीय कारण भी है। ज्योतिषशास्त्र में पितृ दोष काफी अहम माना जाता है।
जब जातक सफलता के बिल्कुल नज़दीक पंहुचकर भी सफलता से वंचित होता हो, संतान उत्पत्ति में परेशानियां आ रही हों, धन हानि हो रही हों तो ज्योतिष शास्त्र पितृदोष से पीड़ित होने की प्रबल संभावनाएं होती हैं। इसलिये पितृदोष से मुक्ति के लिये भी पितरों की शांति आवश्यक मानी जाती है। इस कार्य में ब्राम्हणों को भोजन दक्षिणा के अलावा गरीबो दिन पुण्य व गाय, कौवा, कुत्तों को भोजन दिए जाने को ज्यादा श्रेष्ठ माना गया है।
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