उत्तराखंड के तीर्थयात्री भी हो सकते थे अनंतनाग आतंकी हमले का शिकार


अमरनाथ यात्रा पूरी कर दल के सभी सदस्य कटरा स्थित मां वैष्णो देवी के दरबार में मत्था टेकने भी पहुंचे। कहा कि बाबा के दर्शन करने के बाद 64 बसों का काफिला रवाना हुआ था।
गुजरात के यात्रियों की बस भी साथ-साथ चल रही थी लेकिन वह अनंतनाग में खराब हो गई। हल्द्वानी के 14 लोग एक घंटा पहले गुजरात की बस को क्रास कर आगे निकल गए।
इस दल में तारा दत्त पलड़िया, चंदन जोशी, धर्मानंद जोशी, रमेश चंद्र जोशी, हेम कांडपाल, किशोर कांडपाल, प्रकाश कांडपाल, रवि पंत, विमल पाल, बीरू पाल, मुकेश बृजवासी, सोनो भाई, मुकेश परगाई, पंकज जोशी शामिल हैं।
किशोर ने बताया कि अमरनाथ यात्रा के दौरान सेना के जवानों ने श्रद्धालुओं की काफी सेवा की। जवान तबियत खराब होने पर तत्काल मदद के लिए आगे आते हैं। वे श्रद्धालुओं को उठाकर ऊंचाई तक ले जाने में भी मदद करते हैं। सेना और सीआरपीएफ के जवानों की सुरक्षा व्यवस्था काफी चुस्त है।
बच्चे भी करते हैं नफरत
किशोर कांडपाल और चंदन जोशी ने बताया कि पहलगाम में बच्चे भी पत्थर मारने का प्रशिक्षण ले रहे थे। वहां टैक्सी चालक यह जताने की कोशिश कर रहे थे कि वे भारत से ताल्लुक नहीं रखते हैं। उनके अंदर श्रद्धालुओं से कोई अपनापन महसूस नहीं हो रहा था। बातचीत के दौरान बोल रहे थे कि भारत के लोग कश्मीर में आए हैं।
संदिग्ध व्यक्तियों और वस्तुओं की जांच के लिए चेकिंग करेगी। जिले में चेकिंग के लिए डाग स्क्वायड था लेकिन आला अधिकारियों के निर्देश पर उसे हरिद्वार भेजा गया है।
इस पर एसएसपी का कहना है कि अधीनस्थ अधिकारी बगैर डाग स्क्वायड और बम डिस्पोजल टीम के साथ रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और होटलों की चेकिंग कर रहे हैं। चेकिंग सुनिश्चित करने के लिए अधीनस्थों से रिपोर्ट मांगी है।





