आर्मी कैंट के पास एंटी टैंक गोले मिलने से मचा हड़कंप, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट….

यहां आर्मी कैंट के पास एंटी टैंक गोले मिलने से हड़कंप मचा हुआ है। बृहस्‍पतिवार को मिले इन गोलों को आरपीजी-7 राउंड बताया जा रहा है। यह बेहद घातक होता है। बताया जाता है कि इस तरह के गोले का इस्‍तेमाल आमतौर पर आतंकी करते हैं। इससे सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। मामले की जांच की जा रही है। यदि ये गोले फट जाते तो करीब आधे किलोमीटर क्षेत्र में भारी तबाही हो सकती थी। कई बार हिसार सैन्‍य छावनी के आतंकियों के टारगेट पर होने के इनपुट मिले हैं। ऐसे में यह मामला बेहद संवेदनशील हो गया है।

बता दें कि ये एंटी टैंक गोले हिसार सैन्य छावनी से करीब एक किलोमीटर दूर बसे सातरोड कलां गांव में मिले हैं। बृहस्पतिवार सुबह करीब आठ बजे गांव के 32 वर्षीय सुखदर्शन उर्फ बिट्टू गांव के तालाब के पास गया था। वहां बम की तरह दिखने वाले एंटी टैंक राउंड दिखे तो उसने शोर मचा दिया। इसके बाद ग्रामीण और सरपंच प्रमोद कुमार मौके पर पहुंच गए। सरपंच की सूचना मिलते ही सेना और पुलिस ने मौके पर पहुंच गई। इन एंटी टैंक राउंड को तालाब के किनारे मिट्टी में दबाकर ऊपर से ईंटों से ढका गया था। इसके बाद सेना और पुलिस ने साथ मिलकर तालाब के आसपास सर्च अभियान चलाया, लेकिन वहां कोई अन्य विस्फोटक नहीं मिला।

गांव के तालाब के पास युवक ने बम देख मचाया शोर, सदर थाना पुलिस व सेना मौके पर पहुंची

इसके बाद हिसार और सिरसा से बम निरोधक दस्ता वहां पहुंचा। बम निरोधक दस्ते के सदस्‍यों ने एंटी टैंक गोले को देखकर हाथ खड़े कर दिया और सेना द्वारा इसे डिफ्यूस करने की बात कही। इसके बाद आर्मी कैंट से मेजर हिमांशु के नेतृत्व में बम निरोधक दस्ता पहुंचा। सेना ने इन एंटी टैंक राउंड को उठाकर मिट्टी से आधे भरे कट्टों में डाला। इसके बाद छावनी से दूसरी टीम आई और दो अलग-अलग कट्टों में रखे एंटी टैंक राउंड को ट्रक में डालकर साथ ले गई।

मेजर हिमांशु ने बताया सबसे पहले हम जांच करेंगे कि यह एंटी ट्रैंक राउंड सेना के हैं या कहीं और से यहां लाकर छिपाए गए हैं। यह अभी जिंदा हैं और इसमें काफी बारूद है। आला अफसरों को इसकी रिपोर्ट दी जाएगी और उनके निर्देशानुसार इनको डिफ्यूज किया जाएगा।  दो एंटी ट्रैंक राउंड मिलने से सुरक्षा एजेंसियां भी चौकन्ना हो गई हैं।

आरपीजी-7 गोले हैं दोनों

सेना के रिटायर्ड अधिकारियों ने जब दोनों राउंड के फोटो देखे तो उन्होंने बताया कि दोनों आरपीजी-7 गोले हो सकते हैं। इसका प्रयोग अब सेना में नहीं होता, मगर आतंकवादी आज भी आरपीजी-7 का प्रयोग भारतीय सेना के खिलाफ करते हैं। हालांकि इसी प्रकार के गोले का बीएमपी टैंक की मेनगन में भी इस्तेमाल किया जाता है। इनकी फायर रेंज 500 से 700 मीटर होती है। यह दुश्मन सेना के ट्रैंक व बंकर उड़ाने में प्रयोग किए जाते हैं। इस प्रकार के गोले का हिसार व आसपास के क्षेत्रों में ट्रेनिंग के दौरान कहीं भी प्रयोग नहीं होता। ऐसे में पूरी संभावना है कि यह प्रदेश से बाहर के क्षेत्र से यहां लाए गए हैं। यह लंबे समय तक प्रयोग में लाए जा सकते हैं।

यह होता है एंटी टैंक राउंड

सेना के रिटायर्ड वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार एंटी टैंक राउंड का इस्तेमाल टैंक, बख्तर बंद गाडिय़ों और बंकरों को उड़ाने में किया जाता है। राउंड हथियार का वह भाग है जो निर्धारित टारगेट पर जाकर विस्फोट करता है। पहले में भारतीय सेना में ऐसे राउंड प्रयोग होते थे। आरपीजी-7 हथियार और बीएमपी टैंक से जो मिसाइलें दागी जाती हैं, उनके विस्फोटक भाग को राउंड कहा जाता है।

एंटी टैंक राउंड के फटने से आधा किलोमीटर क्षेत्र में मचती तबाही

पूर्व सैन्य अधिकारियों ने दावा किया कि यदि यह एंटी टैंक राउंड फट जाते तो आधा किलोमीटर के क्षेत्र में तबाही मचती। जिस स्थान से यह एंटी टैंक राउंड मिला है वहां से कुछ ही दूरी पर सातरोड का रेलवे स्टेशन है, जहां से सेना के हथियार व सामान आता-जाता है। इसके अलावा सातरोड क्षेत्र में सेना के पूर्व अधिकारी व कर्मचारियों की कालोनियां भी हैं।

संवेदनशील क्षेत्रों में आता है हिसार

अति संवेदनशील क्षेत्रों में हिसार को भी माना जाता है। यहां सैनिक छावनी, बीएसएफ कैंप के अलावा 90 किमी दूर एयरफोर्स स्टेशन भी है। यहां हमेशा सेना की मूवमेंट रहती है। ऐसे में एंट्री टैंक राउंड का मिलने से खुफियां एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। इसके अलावा हिसार में पाक जासूस भी पकड़े जा चुके हैं, जिनके पास से हिसार सैनिक छावनी के नक्शे सहित कई महत्वपूर्ण जानकारियां थी। वहीं हिसार में काफी साल पहले बालसमंद माइनर की खोदाई के दौरान साथ जिंदा हैंड ग्रेनेड भी मिले थे।

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