आम लोगों ने शायद ही देखा होगा बजरंगबली का यह दुर्लभ स्वरूप

हिंदू धर्म में कई देवी देवताओं की पूजा की जाती है। श्री हनुमान जी के भी करोड़ों भक्‍त हैं। अपने भक्‍तों के लिए श्री हनुमान कभी संकटमोचन, तो कभी दास बन जाते हैं। इनके एक नहीं कई स्‍वरूप हैं, जिनमें से एक स्‍वरूप ऐसा है, जिसके बारे में कम ही भक्‍तों को पता होगा। हम बात कर रहे हैं अघोर हनुमान जी की, जिसके दर्शन साधारण लोगों को लगभग असंभव माने जाते हैं। श्री हनुमान जी का यह गुप्त और उग्र अवतार, जिसकी साधना तंत्र विद्या और तंत्र शास्त्रों में अत्यंत गोपनीय रखी जाती है।

क्या है बजरंगबली का अघोर स्वरूप?
‘अघोर’ शब्द का अर्थ होता है जो घोर न हो, यानी सहज और शांत, लेकिन जब यह साधना के संदर्भ में आता है, तो इसका संबंध भगवान शिव के अघोर रुद्र रूप से जुड़ जाता है। हनुमान जी को भगवान शिव का ही 11वां रुद्रावतार माना गया है।

अघोर हनुमान स्वरूप में मारुति नंदन का रूप अत्यंत उग्र, प्रचंड और शक्तिशाली होता है। यह अवतार सृष्टि की उन आसुरी शक्तियों, नकारात्मक ऊर्जाओं और तीव्र बाधाओं का नाश करने के लिए जाना जाता है, जिन्हें सामान्य पूजा-पाठ से दूर करना संभव नहीं होता। इस रूप में हनुमान जी उग्र भैरव और महाकाल के एक सहयोगी स्‍वरूप बन जाते हैं।

गुप्त रूप से क्यों की जाती है इनकी पूजा?
अघोर हनुमान जी की पूजा सामान्य मंदिरों में या घरों में नहीं की जाती। इसके पीछे कई मुख्य कारण हैं:

सबसे पहली बात तो यह है कि हनुमान जी के इस स्‍वरूप की पूजा केवल अघोरी ही करते हैं। इस साधना में मंत्र और ऊर्जा का प्रवाह अत्यंत तीव्र होता है। यदि बिना नियम, संयम के इसकी पूजा की जाए, तो साधक को इसके विपरीत परिणाम भी झेलने पड़ सकते हैं।
अघोर हनुमान जी की पूजा छुपाकर की जाती है। इसलिए इन्‍हें गुप्‍त स्‍थानों जैसे – श्मशान, जंगलों, गुफाओं या विशेष तंत्र पीठों में किया जाता है। इसका समय भी मध्यरात्रि होता है, ताकि इस साधना को कोई देख न पाए।
इस पूजा के कठोर नियम होते हैं । पूजा में एक छोटी सी भूल भी साधना को निष्फल या घातक बना सकती है।

अत: गृहस्थ और सामान्य भक्‍तों को हनुमान जी के अघोर स्‍वरूप की जगह सौम्य और संकटमोचन स्वरूप की ही उपासना करनी चाहिए।

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