आनंद विहार बना जाम का गढ़, तालमेल की कमी से दिल्ली के प्रवेश द्वार पर अराजकता का आलम

दिल्ली का प्रमुख प्रवेश द्वार आनंद विहार आज राजधानी की ट्रैफिक अव्यवस्था की सबसे बड़ी मिसाल है। यूपी से दिल्ली में दाखिल होने वाले लाखों यात्रियों के लिए यह इलाका पहला पड़ाव है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर यहां सिर्फ जाम, अव्यवस्था और अव्यवस्थित योजना ही नजर आती है। आईएसबीटी, रेलवे टर्मिनल, मेट्रो स्टेशन और दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर जैसे बड़े ट्रांसपोर्ट हब एक ही दायरे में होने के बावजूद यहां कोई स्थायी और समन्वित ट्रैफिक व्यवस्था नहीं है।
आनंद विहार में हर दिन अंतरराज्यीय बस, लोकल बस, ट्रेन, मेट्रो, निजी वाहनों, ऑटो, ई-रिक्शा और पैदल यात्रियों का सैलाब उमड़ता है। सुबह और शाम तो हालात सबसे बदतर हो जाते हैं। दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, स्कूली बसें, लंबी दूरी की बसें और मालवाहक जाम में फंस जाते हैं। कई बार एक किलोमीटर की दूरी तय करने में 40 से 50 मिनट तक लग जाते हैं।
अव्यवस्था की ये वजह आई सामने
ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि जाम की सबसे बड़ी वजह, प्रशासनिक तालमेल में कमी है। ट्रैफिक पुलिस, लोक निर्माण विभाग नगर निगम, परिवहन विभाग और बस संचालन एजेंसियां, सबकी जिम्मेदारियां अलग-अलग तय हैं, लेकिन संयुक्त रणनीति कहीं नजर नहीं आती। आईएसबीटी के बाहर अवैध बस स्टॉप और सड़क किनारे बड़ी संख्या में निजी बसें ट्रैफिक को ज्यादा संकरा कर देती हैं। अधिकारियों ने कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए मास्टरप्लान तैयार हो रहा है।
जान का जोखिम
इतने व्यस्त ठिकाने के बावजूद आनंद विहार में सड़क पार करने की एक ही व्यवस्था है। इस कारण लोग एक से दूसरी तरफ जाने के लिए जान जोखिम में डालकर सड़क पार करते हैं। इससे राहगीरों के लिए तो खतरा है ही, वाहन चालकों को लिए भी मुसीबत है। उनके साथ भी दुर्घटना का आशंकी लगी रहती है। लोग सड़क पार करने के लिए अचानक रेलिंग से सड़क पर कूद पड़ते हैं। यह बेहद खतरनाक है।





