आइये इंतज़ार करें भीषण गर्मी का, ख़त्म हो सकता है कोरोना वायरस
कोरोना का कहर अपने चरम पर है। दुनिया के कई बड़े देश इससे जूझ रहे हैं। भारत में भी 3000 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में आज सभी के जेहन में बस एक ही सवाल है कि कोरोना का प्रकोप आखिर कब कम होगा। हालांकि कोरोना कि शुरुआत के साथ ही यह कहा जाने लगा था कि तेज़ गर्मी का मौसम आते ही कोरोना से राहत मिल जायेगी। एक नई रिसर्च ने भी इस बात का दावा किया है कि गर्म मौसम से कोरोना वायरस के फैलाव को धीमा करने में मदद मिल सकती है। लेकिन यहाँ तो मौसम भी अनोखे रंग दिखा रहा है। कभी धूप, कभी छाव का खेल जारी है। अगले एक-दो दिन में बारिश के फिर से आसार बन रहे हैं। लोगों कि साँसे अटकी हुई हैं।
कोरोना को लेकर कई अध्ययन किये गए हैं। इनसे संकेत मिलता है कि कोविड-19 बीमारी गर्मियों में लोगों के बीच आसानी से नहीं फैल पाएगी। यह देखा गया है कि गर्मियों में तापमान बढ़ने और नमी बढ़ने से इन्फ्लूएंजा जैसे वायरसों के प्रकोप में कमी आने लगती है। समझा जाता है कि गर्मियों में मानव आचरण और हमारे शरीर की प्रतिरोधी प्रणाली में होने वाले परिवर्तनों के कारण इन वायरसजनित बीमारियों की संक्रामकता कम होने लगती है। इससे यह उम्मीद जगी है कि कोरोना वायरस से जूझ रहे उत्तरी गोलार्द्ध को ग्रीष्म ऋतु के आगमन के बाद महामारी से कुछ राहत मिल सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटिश सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार सर पैट्रिक वालेंस ने कहा है कि गर्मियों में कोविड-19 के मामलों में कमी आएगी। हालांकि, इस मामले में आंकड़े बहुत सीमित हैं, फिर भी हाल ही में किए गए कई अध्ययनों से इस बात के प्रमाण मिले हैं कि गर्मियां वायरस के प्रकोप को कम कर सकती हैं। चीन में बीजिंग और शिन्हुआ यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने चीन के 100 शहरों में वायरस के फैलाव की छानबीन करने के बाद पाया कि उच्च तापमान और उच्च नमी ने कोविड-19 के प्रसार को काफी कम कर दिया था। अध्ययन से पता चला कि प्रत्येक वायरस वाहक व्यक्ति से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या बढ़े हुए तापमान और उच्च नमी से कम हो गई। अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के रिसर्चर भी इसी तरह के निष्कर्षों पर पहुंचे हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन वायरोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर मोहम्मद सजादी ने कहा कि हमने अभी तक जो आंकड़े जुटाएं हैं उनको देखकर लगता है कि गर्म और उष्ण जलवायु में वायरस के लिए एक से दूसरे व्यक्ति में फैलना मुश्किल होता है। सजादी ने इस रिसर्च का नेतृत्व किया है। अध्ययन में कोविड-19 के फैलाव के बारे में मौसम के आंकड़ों का प्रयोग किया गया। रिसर्चरों ने पाया कि वुहान, टोक्यो और मिलान में सर्दियों की जलवायु एक जैसी है। इन शहरों में सर्दियों का औसत तापमान 4 से 11 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है और नमी 47 से 79 प्रतिशत के बीच रहती है। इन तीनों शहरों में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या बहुत ज्यादा थी। अपने अध्ययन में उन्होंने चेतावनी दी कि महामारी का एपिसेंटर अगले कुछ हफ्तों में दक्षिण यूरोप से उत्तरी यूरोप की तरफ बढ़ सकता है।
एमआईटी ने अपने अध्ययन में पाया कि 22 मार्च तक हुए वायरस के प्रसार के 90 प्रतिशत मामले ऐसे क्षेत्रों में देखने में आए जहां तापमान 3 और 17 सी के बीच और नमी एक खास रेंज में थीं। अध्ययन में कहा गया है कि अमेरिका के एरिजोना, टैक्सस और फ्लोरिडा जैसे गर्म क्षेत्रों में न्यूयॉर्क और वाशिंगटन की तरह मामले सामने नहीं आए। विश्व में हुए मामलों में पांच प्रतिशत मामले इन इन दोनों शहरों में सामने आए। लेकिन एमआईटी रिसर्चरों ने चेताया है कि उनके निष्कर्षों का यह अर्थ नहीं है कि वायरस गर्म नमी वाले क्षेत्रों में नहीं फैल सकता। रिसर्चरों ने कहा कि दुनिया में वायरस के प्रसार को धीमा करने के लिए जन स्वास्थ्य के लिए कारगर कदम उठाने बहुत जरूरी है।
उधर, फ्रांस में किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सिक्लोरोक्विन और एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन के मिश्रण से कोरोना वायरस से फैली कोविड-19 बीमारी को रोका जा सकता है। इन परीक्षणों के बावजूद चिकित्सा जगत क्लोरोक्विन के प्रयोग को लेकर आश्वस्त नहीं है। दूसरी तरफ, चीन ने दावा किया है कि कोविड-19 के इलाज में जापान की नई एंटी फ्लू दवा कारगर सिद्ध हुई है। चीनी डॉक्टरों ने कोरोना के 340 मरीजों का इलाज फेविपिराविर से किया, जापानी दवा एविगन का मुख्य हिस्सा है। इस बीच, एक राहत की खबर यह आई है कि बीसीजी टीका कोविड-19 से बचाव कर सकता है।
हालांकि अभी तक कोई ऐसी दवा नहीं है जो वायरस को मार सके और ऐसी कोई वैक्सीन नहीं है जो इस बीमारी से हमारा बचाव कर सके। फिलहाल कोरोना के खिलाफ जंग में वैज्ञानिक और डॉक्टर पुरानी दवाओं को आजमा रहे हैं। कोरोना का इलाज करने के लिए डॉक्टर अभी इस समय उपलब्ध एंटी वायरल दवाएं आजमा रहे हैं। भारत में जयपुर के डॉक्टरों ने तीन मरीजों को एड्स की दवाओं से ठीक किया है। अमेरिका में कोविड-19 के इलाज के लिए मलेरिया की पुरानी दवा, क्लोरोक्विन पर परीक्षण चल रहे हैं, जिनके नतीजों का इंतजार है। अब तो बस इंतज़ार है तेज़ गर्मी के मौसम का, जिससे कोरोना से राहत मिल सके।





