अब ट्रैकिंग के लिए मशहूर हैं ये जगहें किसी जमाने में भगवान श्रीराम-लक्ष्मण ने की थी यह पूजा

क्या आपको पता है कि मर्यादापुरुषोत्तम भगवान राम और उनके छोटे भाई लक्ष्मण ने अपने जीवन की आखिरी तपस्या कहां की थी।अगर नहीं पता तो हम आपको उन जगहों की सैर पर भी ले जा रहे हैं।भगवान राम ने अपनी आखिरी तपस्या देवप्रयाग और उनके छोटे भाई लक्ष्मण ने तपोवन में की थी। ये दोनों ही जगहें देवभूमि उत्तराखंड में हैं और अब मशहूर ट्रैकिंग स्पॉट के तौर पर इन्हें जाना जाता है।
देवप्रयाग अलकनंदा-भागीरथी नदी के संगम पर बसा है। कहा जाता है कि देवभूमि उत्तराखंड के पंच प्रयागों में से एक देवप्रयाग है। मान्यता है कि जब राजा भागीरथ ने गंगा को पृथ्वी पर उतरने के लिए मनाया तो उनके साथ ही 33 करोड़ देवी- देवता भी गंगा के साथ स्वर्ग से देवप्रयाग में उतरे थे। ये ही वो जगह है जहां भागीरथी और अलकनंदा नदी का संगम होता है ।
तपोवन गढ़वाल में है। इस जगह की दूरी गंगोत्री हिमनद से 6 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां के अद्भुत नजारे पर्यटकों का दिल जीत लेते हैं। तपोवन से दूर-दूर तक फैली हिमालय की चोटियां दिखती हैं।तपोवन को ही नंदनवन भी कहते हैं। यहां पर्वतारोहण के लिए कैंपिंग की जाती है। गोमुख ट्रैकिंग के पास ही तपोवन है जहां हर साल लाखों की तादाद में विदेशी पर्यटक ट्रैकिंग के लिए उमड़ते हैं। नंदनवन से शिवलिंग, भागीरथी, केदार डोम, थलय सागर और सुदर्शन जैसे चोटियों का शानदार दृश्य दिखता है।
पर्यटक यहां सतोपंत, खर्चाकुंड, कालिंदी कल, मेरू और केदारडोम पर ट्रैकिंग और कैपिंग करते हैं। ट्रैकिंग के अलावा पर्यटक पर्वतों पर चढ़ाई और रॉक क्लाइम्बिंग भी करते हैं। यहां के हरियाली से भरे चीड़ और देवदार के वृक्ष पर्यटकों को काफी लुभाते हैं।
देवप्रयाग समुद्र तल से 830 मीटर की ऊंचाई पर है। ऋषिकेश से देवप्रयाग की दूरी महज 70 किलोमीटर के करीब है। यह भी कहा जाता है कि देवप्रयाग में ही मुनि देवशर्मा ने भगवान विष्णु की कठिन तपस्या की थी और भगवान ने उन्हें वरदान दिया था कि इस स्थान का नाम कालांतर में उनके नाम पर ही रखा जाएगा।
पौराणिक मान्यता के मुताबिक देवप्रयाग में भगवान राम ने अपनी आखिरी तपस्या की थी। लंका विजय के बाद लौटते वक्त भगवान राम ने यहां तपस्या की थी। मान्यता है कि भगवान राम ने ब्राह्मण वध (रावण वध) के पाप से मुक्त होने के लिए देवप्रयाग में तपस्या की थी। उन्होंने यहां एक शिला पर बैठकर तपस्या की थी। यहां वो शिला आज भी मौजूद है।
देवप्रयाग में ही मां गंगा के मंदिर के पास ही हनुमान जी की गुफा भी है। इस गुफा को लेकर मान्यता है कि भगवान राम के सेवक हनुमान जी भी यहां आए थे। देवप्रयाग में बड़ी तादाद में श्रद्धालु आते हैं। यह बेहद मनोरम स्थल है जहां की खूबसूरती और शांत वातावरण श्रद्धालु और पर्यटकों के दिल में सुकूं देता है।





