अक्षय तृतीया 2026: अक्षय तृतीया को इतना खास क्यों माना जाता है? जानिए इसका महत्व..

अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) हिंदू और जैन धर्म में बहुत पवित्र मानी जाती है। ‘अक्षय’ का अर्थ है जिसका कभी ‘क्षय’ न हो, यानी जो कभी खत्म न हो। अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya 2026) का दिन सुख-समृद्धि और शुभ शुरुआत के लिए खास माना जाता है. इस दिन सोने की खरीदारी परंपरागत रूप से सौभाग्य और वैभव का प्रतीक मानी जाती है

हिंदू धर्म में हर तिथि और वार का विशेष महत्व बताया गया है लेकिन अक्षय तृतीया का स्थान बेहद खास माना जाता है. वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व सनातन परंपरा में अत्यंत शुभ माना गया है. मान्यता है कि इस दिन किए गए दान, जप, पूजन और शुभ कार्य कभी निष्फल नहीं होते बल्कि उनका फल लगातार बढ़ता रहता है.

यही कारण है कि लोग इस दिन नए कार्यों की शुरुआत, निवेश और खरीदारी को बेहद शुभ मानते हैं, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और उन्नति बनी रहती है. अक्षय तृतीया के दिन किसी भी मुहूर्त की जरूरत नहीं पड़ती है. इसी दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की भी पूजा-आराधना की जाती है इस दिन क्या करना शुभ और क्या अशुभ होता है.

वैदिक पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि 19 अप्रैल को शुरू हो रही है लेकिन सूर्योदय के समय यह तिथि 20 अप्रैल को रहेगी. हिंदू मान्यताओं में उदयातिथि को ज्यादा महत्व दिया जाता है, इसलिए त्योहार उसी दिन मनाया जाता है, जब तिथि सूर्योदय पर मौजूद हो. इसी वजह से इस बार अक्षय तृतीया 20 अप्रैल को ही मानी जाएगी.

अक्षय तृतीया का दिन सुख-समृद्धि और शुभ शुरुआत के लिए खास माना जाता है. इस दिन सोना खरीदना परंपरागत रूप से सौभाग्य और वैभव का प्रतीक माना जाता है. निवेश के लिहाज से भी यह तिथि बेहद अनुकूल होती है, इसलिए नया कारोबार शुरू करना लाभकारी माना जाता है. वाहन खरीदने या बच्चों के लिए बचत योजना शुरू करने जैसे फैसले भविष्य को सुरक्षित बनाते हैं. साथ ही इस पावन दिन पर विवाह, सगाई जैसे मांगलिक कार्य करना जीवन में खुशियां और सकारात्मकता लेकर आता है.

अक्षय तृतीया के पावन दिन घर की साफ-सफाई और सकारात्मक माहौल बनाए रखना बेहद जरूरी माना जाता है. इस शुभ अवसर पर नकारात्मक आदतों से दूर रहना चाहिए, जैसे शराब का सेवन, नाखून काटना या तामसिक भोजन करना. साथ ही इस दिन कर्ज लेने या किसी से उधार लेने से बचना बेहतर होता है क्योंकि इसे अशुभ माना गया है. कोशिश करें कि किसी का अपमान न करें और घर में शांति बनाए रखें. आपसी प्रेम और सद्भाव के साथ यह दिन बिताना ही सबसे शुभ फल देने वाला माना जाता है.

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