देश में निर्मित ‘जोरावर’ का लद्दाख में सफल परीक्षण

परीक्षण इस महीने के अंत तक जारी रहेगा। अगले साल भारतीय सेना के साथ उपयोगकर्ता परीक्षण शुरू किए जाएंगे।

स्वदेशी लाइट टैंक जोरावर का लद्दाख के ऊंचाई वाले क्षेत्र में परीक्षण सफल रहा है। न्योमा में टैंक की गोलाबारी सफल रही है। परीक्षण इस महीने के अंत तक जारी रहेगा। अगले साल भारतीय सेना के साथ उपयोगकर्ता परीक्षण शुरू किए जाएंगे।

चीन के लाइट टैंकों की तैनाती के जवाब में भारत ने यह टैंक बनाया है। परीक्षणों का उद्देश्य टैंक की फायरपावर, गतिशीलता और दुर्गम भूभाग में सुरक्षा का मूल्यांकन करना है।

इसे मेक इन इंडिया पहल के तहत डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन और लार्सन एंड टुब्रो के सहयोग से बनाया गया है। 25 टन वजनी यह टैंक विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में तेज संचालन के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों का मुकाबला करने के लिए एक सक्रिय सुरक्षा प्रणाली (एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम) है।

यह नदी क्षेत्रों, जैसे पांगोंग त्सो झील में संचालन के लिए उभयचर क्षमता से लैस है। इस क्षेत्र में चीनी लाइट टैंकों से जुड़े टकराव के इतिहास को देखते हुए यह क्षमता गहनता से जांची जा रही है। यह परीक्षण ऐसे समय में हो रहा है जब एलएसी पर नाजुक विघटन प्रक्रिया चल रही है। लद्दाख में जोरावर टैंक की मौजूदगी भारत की भविष्य की चुनौतियों से निपटने की तत्परता का मजबूत संकेत है।

खासकर 2020 के सीमा संघर्ष के बाद। 19वीं शताब्दी के योद्धा जोरावर सिंह कहलूरिया, जो लद्दाख में अपने विजय अभियानों के लिए प्रसिद्ध हैं, के नाम पर इस टैंक का नाम रखा गया है। इसके परीक्षण रणनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों रूपों में महत्वपूर्ण हैं।

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