World TB Day 2019: क्या आप जानते हैं फेफड़ों के अलावा शरीर के इन अंगों में भी हो सकता है TB

हेल्थ डेस्क|
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ग्लोबल टीबी 2018 रिपोर्ट के उपरोक्त आंकड़ों से रोग की गंभीरता का पता चलता है जो आमतौर पर फेफड़ों को प्रभावित करता है। यह फैलने वाली (कम्युनिकेबल) बीमारी है और यह इसे और घातक बनाती है। खांसी और छींक से हवा में छोड़ी गई छोटी बूंदों के माध्यम से टीबी बैक्टीरिया आसानी से दूसरे लोगों में फैल सकता है।

onlymyhealth वेबसाइट पर पब्लिश आर्टिकल के अनुसार इस बीमारी के विनाशकारी स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक प्रभावों के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिए हर साल 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है। इसी दिन 1882 में डॉ. रॉबर्ट कोच ने तपेदिक, टीबी बैसिलस का कारण बनने वाले जीवाणु की खोज की घोषणा की थी। इसी खोज ने इस व्यापक वैश्विक महामारी समाप्त करने की दिशा में संभावित निदान समाधानों के लिए प्रेरित किया।
डब्ल्यूएचओ 2018 की रिपोर्ट के अनुसार 2017 में दुनियाभर में 10 मिलियन लोगों में टीबी का पता चला था। इनमें से 27% नए पंजीकृत मामले भारत से थे, जो टीबी के 30 उच्च संख्या वाले देशों में सबसे अधिक था। वास्तव में भारत सहित सात अन्य देशों- चीन, इंडोनेशिया, फिलीपींस, पाकिस्तान, नाइजीरिया, बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका में दुनिया के 87% मामले सामने आए। 
इस प्रकार उपरोक्त डेटा इस बीमारी को जानने के लिए और भी महत्वपूर्ण बनाता है जो कि इलाज योग्य और रोके जाने योग्य दोनों है। चलिये… पता करते हैं- 

टीबी के प्रकार 
टीबी संक्रमण के दो प्रकार हैं जो आमतौर पर फेफड़ों पर हमला करते हैं, लेकिन शरीर के अन्य भागों में भी फैल सकते हैं-
लैटेंट टीबी  

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इस मामले में बैक्टीरिया शरीर में रहता है, लेकिन निष्क्रिय रहता है और कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है। इसका कोई लक्षण नहीं होता है और यह संक्रामक भी नहीं है। इस तरह के 10 प्रतिशत लोगों में ही इसके सक्रिय होने की संभावना होती है। वह भी उन लोगों में जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली जोखिम में होती है। उदाहरण के लिए धूम्रपान करने वाले, कुपोषण से पीड़ित या एचआईवी संक्रमण के साथ रहने वाले लोग।
लेटेंट टीबी इंफेक्शन वाले सभी लोगों को उपचार की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन, भारत जैसे उच्च टीबी बोझ वाले देशों में एचआईवी के साथ रहने वाले लोगों में लेटेंट टीबी और फेफड़े के टीबी रोगी के साथ एक ही घर में रहने वाले पांच साल से कम उम्र के बच्चे और कुछ अन्य ऐसे उच्च जोखिम वाले समूहों में आते हैं, जिनका तत्काल इलाज किया जाना चाहिए।

एक्टिव टीबी

यह एक गंभीर रूप है जो व्यक्ति को बीमार महसूस कराता है। यह संक्रामक भी है और इसके लिए डॉक्टर के तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है। सबसे आम प्रकार की टीबी फेफड़े, आंत, रीढ़, लिम्फ नोड्स और त्वचा की होती हैं। 

इसके क्या कारण हैं और क्या लक्षण हैं?
टीबी, माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया के कारण होता है, जो खांसी, बोलने, छींकने, थूकने आदि से फैलता है। यह ज्यादातर उन लोगों को संक्रमित करता है जो ज्यादातर समय टीबी के रोगी के साथ रहते हैं या काम करते हैं। हालाँकि, एक्टिव टीबी के कुछ लक्षण हैं-

तीन या अधिक सप्ताह तक खांसी  
खांसी में खून आना
सीने में दर्द या सांस लेते या खांसते समय दर्द 
भोजन की इच्छा नहीं होना
अनैच्छिक वजन कम होना
अनावश्यक थकान
बुखार और रात को पसीना आना

यदि तपेदिक शरीर के अन्य भागों में फैलता है, तो लक्षण अंग-विशेष में बदल जाते हैं- यदि मस्तिष्क में, यह मेनिन्जाइटिस का कारण बन सकता है; रीढ़ की हड्डी में दर्द हो सकता है, और हृदय में सबसे घातक हो सकता है, जो रक्त पंप करने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है।
जोखिम में कौन है? 

टीबी युवा वयस्कों में होने वाली बीमारी है, लेकिन यह सभी आयु समूहों को प्रभावित कर सकता है। इसे 2017 डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों से देखा जा सकता है जिसमें कहा गया है कि 0 से 14 वर्ष की आयु के 1 मिलियन बच्चे इसकी वजह से बीमार पड़े और एचआईवी से संबंधित टीबी से पीड़ित लगभग 2,30,000 बच्चों की मौत हो गई। 
यह विकासशील देशों में रहने वाले लोगों में प्रमुख है, जहां से 95% से अधिक मामले और मौतें होती हैं।   
यह बीमारी एचआईवी ग्रस्त व्यक्तियों को दूसरों की तुलना में 20-30 गुना अधिक प्रभावित करने की संभावना है। इसके अलावा कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग बहुत अधिक खतरे में होते हैं। धूम्रपान या तंबाकू का सेवन एक अन्य कारक है जो इस बीमारी और मृत्यु के जोखिम को बढ़ाता है। दुनिया भर में लगभग 7.9% मामले धूम्रपान के कारण हैं।

टीबी का निदान कैसे किया जा सकता है?

टीबी का सबसे आम प्रकार, जो फेफड़ों को प्रभावित करता है, उसे थूक और छाती के एक्स-रे पर किए गए परीक्षणों से डायग्नोज किया जाता है। मॉन्टौक्स परीक्षण नामक स्किन टेस्ट या आईजीआरए नामक एक नई तकनीक लेटेंट टीबी संक्रमण की ओर इशारा कर सकती है। पुष्टि के लिए टीबी बैक्टीरिया के लिए बलगम या शरीर के अन्य ऊतकों या फ्यूइड कल्चर किया जाना चाहिए

क्या टीबी का कोई इलाज है? 
सही दवा और इसका प्रशासन टीबी के अधिकांश मामलों का इलाज है। खुराक और उपाय की अवधि किसी व्यक्ति पर निर्भर करती है –

उम्र
कुल मिलाकर स्वास्थ्य 
दवाओं के लिए कोई प्रतिरोध  
लेटेंट या एक्टिव टीबी 
इंफेक्शन का लोकेशन (रीढ़, फेफड़े, मस्तिष्क, गुर्दे)
इसका उपचार दवाओं का एक संयोजन है, जिसे महीनों तक नियमित रूप से लेना पड़ता है। रेस्पांस और साइड इफेक्ट की जांच के लिए डिलिजेंट फॉलो-अप की आवश्यकता होती है। 
उपचार बीच में छोड़ने से मरीज और समुदाय दोनों को एमडीआर टीबी (मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट टीबी) का खतरा हो सकता है, जिसका इलाज तीन गुना मुश्किल होता है। इसमें उपचार की सफलता से भी समझौता हो सकता है।  
टीबी की दवाएं सरकारी अस्पतालों या सामुदायिक डॉट्स केंद्रों से मुफ्त में ली जा सकती हैं। 

क्या इसे रोका जा सकता है?

अगर घर या काम के माहौल में टीबी का एक रोगी है, तो दूसरों को प्रिवेंटिव मेडिसिन प्रोटोकॉल या क्लोज कॉन्टेक्ट और स्वच्छता बनाए रखने से टीबी को रोका जा सकता है। टीबी रोगी का इलाज करने वाले डॉक्टर के साथ इस पहलू पर चर्चा करना महत्वपूर्ण है
समुदाय में टीबी के प्रसार से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह सुनिश्चित करना है कि सभी टीबी रोगी अपना इलाज पूरा करें। एक अन्य तरीका समुदाय के सभी लोगों के स्वच्छता और बेहतर पोषण स्तर में सुधार करना है।
बीसीजी वैक्सीन नामक टीबी का एक टीका नवजात बच्चों या जिन लोगों को टीका नहीं लगा है, उन्हें दिया जाना चाहिए, इस संबंध में अपने डॉक्टर से चर्चा करें

टीबी नियंत्रण के लिए भारत के प्रयास 

डब्लूएचओ की समयसीमा के आधार पर, जिसका उद्देश्य दस लाख लोगों की आबादी पर टीबी के मरीजों की संख्या को एक से कम करना है, 2017 में भारत सरकार ने 2025 तक देश को टीबी-फ्री बनाने का लक्ष्य रखा है। भारत में 2016 से 2017 तक 1.7% मामलों में गिरावट देखी गई है, साथ ही मौतों की संख्या भी 4,23,000 से घटकर 410,000 हो गई है।
एक नागरिक के रूप में विश्व टीबी दिवस-2019 की थीम और आंदोलन का हिस्सा बनना बेहद महत्वपूर्ण है जो कहता है- ‘यही समय है’ जिसका उद्देश्य 2022 तक टीबी से प्रभावित 40 मिलियन लोगों के इलाज के लिए की गई प्रतिबद्धता पर काम करने की तात्कालिकता पर जोर देना है। टीबी से दुनिया को छुटकारा दिलाना है और समय पर कार्रवाई करके समर्पित रहना है। आप ऐसा कर सकते हैं। इसके लिए टीबी से पीड़ित लोगों को लक्षणों के आधार पर तत्काल इलाज शुरू करने और टीबी से पीड़ित लोगों को अपना इलाज पूरा करने के लिए कहना होगा।

साभार:ओनलीमायहेल्थ डॉट कॉम

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