इन पाँच राज्यों के सहारे चलता है पुरे देश का ख़र्चा, जानिए क्या आपका राज्य है इसमें शामिल ?

टैक्स रेट्स हर साल बढ़ते रहते हैं और इसका मकसद अपरोक्ष रूप से देश के नागरिकों को लाभ पहुंचाना होता है. 2015 में सर्वाधिक टैक्स का भुगतान करने वाले दुनिया के ये 5 देश हैं. साल 2013-14 में 100 करोड़ से अधिक टैक्स जमा करने वालों में तीन लोग थे. जिन्होंने कुल 547 करोड़ रुपए टैक्स के रुप में जमा किए थे. लेकिन नए आंकड़ो के मुताबिक किसी ने भी 2014-15 में 500 करोड़ से अधिक टैक्स जमा नहीं किया है.

इन पाँच राज्यों के सहारे चलता है पुरे देश का ख़र्चा, जानिए क्या आपका राज्य है इसमें शामिल ?भारत की आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा !

इतना ही नहीं टैक्स कलेक्शन में नया राज्य तेलंगाना का योगदान तेजी से बढ़ रहा है. 2014-15 से 2016-17 के बीच तेलंगाना में इनकम टैक्स कलेक्शन दोगुना हो चुका है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मोदी सरकार की टैक्स जमा करने में दी गई छूट के बाद टैक्स जमा करने वाली की संख्या में थोड़ा इजाफा हुआ है. सीबीडीटी के आंकड़ो में भारत में एक मात्र व्यक्ति ऐसा है जिसने 100 करोड़ रुपए से अधिक टैक्स भरा है.

इस व्यक्ति ने 2014-15 में 238 करोड़ रुपए टैक्स के रुप में जमा किए हैं. हालांकि सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स उसके नाम का खुलासा नहीं किया है. खैर आज हम आपको बताने जा रहे हैं पांच ऐसे देश जो भरते हैं सबसे ज्यादा टैक्स. दोस्तों भारत की आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा भले ही उत्तर भारत के राज्यों में बसता हो लेकिन जब देश के खर्चों को चलाने के लिए राज्यों से आने वाले टैक्स की बात हो तो पश्चिम भारत के राज्य सबसे आगे रहते हैं.

भारत में इकट्ठे हुए कुल डायरेक्ट टैक्स !

भारत में सबसे ज्यादा टैक्स पश्चिम भारत के महाराष्ट्र और गुजरात से ही आता है. आयकर विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वित्तवर्ष 2016-17 के दौरान भारत में इकट्ठे हुए कुल डायरेक्ट टैक्स का 37 प्रतिशत हिस्सा अकेले महाराष्ट्र से आया है. यानि देश में सबसे ज्यादा टैक्स चुकाने वाला राज्य महाराष्ट्र है. आयकर विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 के दौरान महाराष्ट्र से 3.14 लाख करोड़ रुपए का टैक्स आया है.

हालांकि महाराष्ट्र के बाद दूसरे नंबर पर उत्तर भारत में स्थित दिल्ली का स्थान है. वित्तवर्ष 2016-17 में इकट्ठे हुए कुल डायरेक्ट टैक्स का 13 प्रतिशत हिस्सा दिल्ली से आया है, इस दौरान दिल्ली ने डायरेक्ट टैक्स में 1.08 लाख करोड़ रुपए का योगदान दिया है. तीसरे नंबर पर 85,920 करोड़ रुपए के साथ कर्नाटक, चौथे नंबर पर 60,077 करोड़ रुपए के साथ तमिलनाडू और पांचवे नंबर पर 38,808 करोड़ रुपए के डायरेक्ट टैक्स के साथ गुजरात का स्थान है.

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