ईयरफोन के तार पर क्यों होती हैं 2 या 3 लाइनें, क्या होता है इनका काम?

आज के वक्त में आते-जाते हर किसी व्यक्ति के कान में आपको ईयरफोन लगा दिख जाएगा. कोई गाना सुनने के लिए तो कोई फिल्में देखने के लिए उनका इस्तेमाल करता है. वहीं कई लोग तो यूं ही लगाए रहते हैं, जिससे लोगों की बातों से पीछा छुड़ा सकें. पर ईयरफोन को अपने स्मार्टफोन में लगाते वक्त आपने एक चीज तो जरूर गौर की होगी. वो ये कि ईयरफोन के जैक पर 2 या 3 लाइनें (Why earphone jacks have lines) बनी होती हैं. जैक का अर्थ है ईयरफोन का वो हिस्सा जो मोबाइल फोन के छेद में घुसता है. क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर उसपर लाइनें क्यों होती हैं?

न्यूज18 हिन्दी की सीरीज अजब-गजब ज्ञान के तहत हम आपके लिए लेकर आते हैं ऐसी अनोखी जानकारियां जो किसी को भी हैरान कर सकती हैं. आज हम बात कर रहे हैं ईयरफोन जैक पर बनी लाइनों के बारे में. दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कोरा पर किसा ने ये सवाल किया कि ईयरफोन या हेडफोन (headphone jack lines) के जैक पर बनी दो या तीन लकीरों का क्या अर्थ है. हम आपको इसी के बारे में बताने जा रहे हैं.

अलग-अलग तरह के होते हैं ईयरफोन
सबसे पहले आपको इस शब्द के बारे में बताते हैं. ईयरफोन के अंत में मेटल का हिस्सा होता है जिसे प्लग बोलते हैं और वो हिस्सा जिस भी यंत्र में लगता है, जैसे मोबाइल फोन या फिर लैपटॉप, उसे जैक बोलते हैं. पर आजकल लोग इन दोनों शब्दों को एक दूसरे की जगह इस्तेमाल कर लेते हैं. टेक से जुड़ी वेबसाइट गेयर पेट्रोल और हेडफोनेस्टी के अनुसार ईयरफोन प्लग के मेटल पिन पर कंडक्टर होते हैं जो ऑडियो सिग्नल को ट्रांसमिट करने में मदद करते हैं. ये गोल्ड, निकल, ब्रास आदि के फिनिश में होते हैं. इसी तरह जो जैक होते है, वो छेद होता है जिसमें कंडक्टर मौजूद होते हैं. इन दोनों में जो कंडक्टर मौजूद हैं, उन्हें खास सिग्नल दिए जाते हैं. ऐसे में ये जरूरी है कि दोनों के कंडक्टर एक दूसरे से मैच करें, तभी ईयरफोन से आवाज सुनाई देगी.

समझें क्या होते हैं ईयरफोन पर बने रिंग के प्रकार
हेडफोन केबल में जितने तार होंगे, उतने ही उसके प्लग में कंडक्टर होंगे. दो तार होने पर दो कंडक्टर होंगे, 3 तार में 3 कंडक्टर होंगे. इसी प्रकार जैक में भी ये कंडक्टर होते हैं. नीचे दी गई फोटो से आप समझ सकते हैं कि ईयरफोन के प्लग के 3 हिस्से होते हैं. टिप, रिंग और स्लीव. हर प्लग में टिप और स्लीव होती है. पर रिंग में फर्क होता है. इन ईयरफोन पर बनी ये लकीरें दर्शाती हैं कि वो कितने ऑडियो चैनल को ट्रांसमिट कर सकता है. जिनपर एक लकीर होती है, उसे TS (Tip Sleeve TS) केबल कहते हैं. ये सिर्फ एक चैनल से ऑडियो ट्रांसमिट कर सकते हैं, यानी मोनो ऑडियो सिग्नल, इसे मोनो जैक भी कहते हैं. ये अक्सर इलेक्ट्रिक गिटार को एम्प से कनेक्ट करने में उपयोग होते हैं.

ईयरफोन रिंग के क्या मायने हैं?
दूसरे होते हैं TRS (Tip, Ring, Sleeve) केबल, जिसमें दो रिंग होते हैं इसे स्टीरियो जैक भी कहते हैं. इसमें दो चैनल सपोर्ट करते हैं. ये आपको उन हेडफोन या ईयरफोन्स में मिलेंगे जिनमें माइक नहीं होता है. इसे आमतौर पर गाने सुनने के लिए लोग इस्तेमाल करते हैं. TRRS (Tip, Ring, Ring, Sleeve) में 3 रिंग होती है और ये दो चैनल और एक माइक को सपोर्ट करते हैं. जिन ईयरफोन्स से आप बात करते हैं, वो ये वाले होते हैं.

आपको बता दें कि टिप लेफ्ट ऑडियो सिग्नल को कैरी करता है. रिंग राइट ऑडियो सिग्नल को कैरी करता है. वहीं स्लीव ग्राउंड सिग्नल को कैरी करता है.

Back to top button