जब पूरी दुनिया में हो रही है ग्लोबल वार्मिंग, तो फिर कई जगह बहुत अधिक सर्दी क्यों…

ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों पर किसी को संदेह नहीं है. पूरी दुनिया में तापमान के बढ़ने के पीछे इसी को जिम्मेदार माना जाता है. फिर भी हाल की सर्दियों में अप्रत्याशित क्षेत्रों में रिकॉर्ड तोड़, अत्यधिक ठंड देखी गई है. इस विरोधाभासी स्थिति में वैज्ञानिक गर्म आर्कटिक-शीत महाद्वीप (डब्ल्यूएसीसी) घटना और इसके दूरगामी प्रभावों की जांच कर रहे हैं. उन्होंने इसी अध्ययन से पता चला है कि आखिर क्यों कुछ इलाकों में बहुत ही तेज ठंड पड़ रहे हैं.

यह अध्ययन ग्वांगजू इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने किया है. यह 2030 के दशक के बाद से मौसम पूर्वानुमान, जलवायु मॉडलिंग और सामुदायिक तैयारियों पर प्रभाव के साथ WACC पैटर्न में एक अहम बदलाव पर जोर देता है. तेजी से आर्कटिक का गर्म होना और घटती समुद्री बर्फ बड़े पैमाने पर वायुमंडलीय परिसंचरण पैटर्न, विशेष रूप से जेट स्ट्रीम को बाधित करती है. यह कैसे होता है, WACC घटना इसी बात पर केन्द्रित है.

जेट स्ट्रीम ठंडी आर्कटिक हवा को गर्म हवा से दक्षिण की ओर अलग करने वाली सीमा के रूप में काम करती है. गर्म होता आर्कटिक की वजह से आर्कटिक और मध्य अक्षांशों के बीच तापमान के अंतर कम हो जाता है. इससे जेट स्ट्रीम कमजोर हो जाती है लेकिन उसका स्वरूप लहरदार हो जाता है.

लहरदार जेट स्ट्रीम से बड़े, घूमने वाले लूप बनने का खतरा हो जाता है. ये लूप ठंडी आर्कटिक हवा को बाहर निकलने और उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया जैसे क्षेत्रों में दक्षिण की ओर जाने का मौका देते हैं. इसी वजह से इन क्षेत्रों में बहुत ही ज्यादा ठंड का अनुभव होता है, जो दर्शाता है कि कैसे गर्म आर्कटिक का उस इलाके मौसम के पैटर्न पर दूरगामी प्रभाव पड़ता है.

अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर जिन-हो यून ने बताया कि डब्ल्यूएसीसी पैटर्न ने सर्दियों के मौसम को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया है, लेकिन वर्तमान में हम जो देख रहे हैं वह केवल एक बड़े बदलाव की शुरुआत है. 2030 के बाद इन घटनाओं में तेजी से गिरावट आएगी. फिर भी, इस गिरावट का मतलब भविष्य में चरम मौसम की घटनाओं में कमी नहीं है. प्रोफेसर यून ने चेतावनी दी कि इसके बजाय, ग्लोबल वार्मिंग तेज होने से सर्दियां गर्म हो जाएंगी. कोल्ड स्नैप कम बार आएंगे, लेकिन जब ऐसा होगा तो उनके अधिक गंभीर नतीजे हो सकते हैं

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