अजब शोध का गजब नतीजा, अगर आप खाते हैं नॉन वेज, तो चिकन की जगह खाएं अजगर!

बढ़िया भोजन का आंकलन केवल सेहत के लिहाज से ही नहीं किया जाता है. उसका उत्पादन कितना हो सकता है, हर जगह पैदा किया जा सकता है या नहीं, पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचाता है, इसे ज्यादा मात्रा में पैदा किया जा सकता है नहीं, ऐसे कई सवाल है जिनके जवाब बेहतर भोजन तय करने में खोजे जाते हैं. ऐसी ही पड़ताल के एक रोचक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया है कि मांसाहारियों के लिए भोजन के रूप में अजगर का विकल्प कई तरह से फायदेमंद हो सकता है. उनका कहना है कि भोजन के तौर पर अजगर के बारे में गंभीरता से सोचा जाना चाहिए.

अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की एक टीम ने अजगर की व्यवसायिक पालन और उसके पर्यावरण संबंधित लागत का परंपरागत मवेशियों के पालन से तुलना कर पड़ताल की. इस अध्ययन के नतीजे चौंकाने वाले रहे और साथ ही उम्मीद जगाने वाले भी. अजगर तेजी से बढ़ते हैं. ऐसा उनके भूखे रहने के दौरान भी होता है. वे जितना खाते हैं उससे कहीं ज्यादा का खाद्य मूल्य देने का काम करते हैं. ऐसा मुर्गियों और कुतरने वाले जानवरों की तुलना में ज्यादा सही है.

इतना ही नहीं उन्हें दूसरे मांस उद्योग से मिलने वाले कचरे का प्रोटीन भी खिलाया जा सकता है. वहीं अजगर को भोजन के रूप मे चुनने के कई असामान्य फायदे हैं. जिस तरह से अजगर असामान्य हालात में भूखे रह कर खुद को जिंदा रख सकते हैं, उससे अजगर की खेती मुश्किल हालात में भी की जा सकती है.

ऑस्ट्रेलिया के मैक्वायर यूनिवर्सिटी के हर्पेटोलॉजिस डेनियल नेटश कहते हैं कि इसका मतलब यह है कि यह खाद्य सुरक्षा के लिहाज से बहुत ही उपयोगी हो सकता है. टीम ने वियतनाम और थाईलैंड के फार्म में 12 महीने तक पाली हुई अजगर की दो प्रजातियों का अध्ययन किया.

इस रोचक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने खाए गए खाने और मांस उत्पादन के अनुपात निकाला जिसमें कम संख्या का मतलब अच्छा उत्पाद होता है. अजगर का यह अनुपात 1.2 निकला, जबकि सालमन मछली के 1.5, कुकुट उत्पादों का 2.8, मांस का 10.0 पाया गया था. यानि वे भोजन के लिहाज से अधिक उपयुक्त हैं.

इस अध्ययन से नेटश और उनके सहयोगी इस नतीजे पर पहुंचे कि अजगर की खेती व्यवसायिक भोजन की उपयुक्तता के लिहाज से कई जैविक और आर्थिक दोनों लिहाज से बढ़िया है. हां अजगरों को पालना एक चुनौती हो सकती है. वहीं इससे यह सवाल भी खत्म नहीं होता है कि क्या हमें मांस खाना भी चाहिए या नहीं जो पिछले कुछ सालों से बड़ी बहस का मुद्दा हो चुका है. इससे अलावा साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने अजगर के स्वाद के मुद्दे को छुआ भी नहीं है.

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