क्या होता है विक्रम संवत? हिंदुओं के लिए क्यों है महत्वपूर्ण

पूरी दुनिया में आपको नया साल एक ही दिन मनाया जाता है और वो है – 1 जनवरी. इसकी वजह ये है कि सभी जगहों पर ग्रिगोरियन कैलेंडर को ही नए साल और कामकाज का आधार माना जाता है. एक बार फिर से हिंदू नववर्ष का पंचांग चर्चा में है क्योंकि मध्य प्रदेश सरकार की ओर से शासकीय कैलेंडर में विक्रम संवत को स्थान दिया गया है. इंटरनेट पर इसके साथ ही लोग पूछने लगे कि आखिर विक्रम संवत् है क्या?
हिंदुओं के नए वर्ष यानि नव संवत्सर की शुरुआत जिस दिन से होती है, उसे विक्रम संवत् कहा जाता है. अंग्रेज़ी कैलेंडर के हिसाब से हम इसकी डेट बदलते हुए देखते हैं लेकिन हिंदू पंचांग के चैत्र माह की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को ये शुरू होता है. ज्यादातर लोगों को इसके बारे में पता ही नहीं होता. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म कोरा पर भी लोग इसके बारे में पूछ रहे हैं. तो चलिए बताते हैं कि आखिर ये होता क्या है?
क्या होता है विक्रम संवत?
हिंदू नववर्ष के पहले दिन को विक्रम संवत की शुरुआत हुई थी. इसे आज भी भारत के अलग-अलग राज्यों में गुड़ी पाड़वा, उगादि जैसे नामों से मनाया जाता है. इसकी शुरुआत राजा चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने की थी और ये अंग्रेज़ी कैलेंडर से 57 साल आगे है. इसे गणित के नज़रिये से सटीक काल गणना माना जाता है और ज्योतिषी भी इसे ही मानते हैं. इसकी समयावधि 354 दिन की होती है और बचे हुए 10 दिन को अधिक मास या चंद्रमास के रूप में माना जाता है. इसे चंद्र की कला के प्रथम दिन से शिरू माना जाता है. राजा चंद्रगुप्त विक्रमादित्य विक्रम संवत के पहले दिन अपनी प्रजा का सारा बचा हुआ कर्ज माफ कर देते थे. उनके शासन काल को चीनी यात्री ह्वेन त्सांग ने गोल्डेन एरा के तौर पर वर्णित किया है.
क्यों हिंदुओं के लिए है महत्वपूर्ण?
सबसे पहली चीज़ तो ये है कि हिंदू मान्यता के अनुसार विक्रम संवत् की शुरुआत की तिथि को ही मानते हैं कि भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की शुरुआत की थी. भारतीय संस्कृति के कई महत्वपूर्ण कार्य हिंदू नववर्ष की शुरुआत के दिन से हुए. इसी दिन से चैत्र मास में देवी आराधना के 9 दिन शुरू हो जाते हैं और नवमी के दिन भगवान राम का जन्मोत्सव मनाया जाता है. भले ही कामकाज के लिए अंग्रेज़ी कैलेंडर को माना जाता हो लेकिन आज भी त्योहार, उपवास और महत्वपूर्ण कार्य के लिए हिंदू इसी कैलेंडर से मुहूर्त देखते हैं.





