US से ट्रेड डील के बाद भारत में क्या-क्या होगा सस्ता?

ट्रंप प्रशासन ने भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 फीसद टैरिफ को हटाते हुए स्पष्ट धमकी बरकरार रखी है कि यदि भारत रूस से तेल का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात फिर से शुरू करता है, तो यह शुल्क दोबारा लगा दिया जाएगा।
शुक्रवार को व्हाइट हाउस की तरफ से जारी नए कार्यकारी आदेश में कहा गया है कि वाणिज्य मंत्री राज्य, खजाना और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर लगातार निगरानी करेंगे कि क्या भारत रूसी संघ के तेल का आयात फिर शुरू कर रहा है। अगर ऐसा होता है तो अमेरिकी राष्ट्रपति के पास भारत पर दोबारा टैक्स लगाने का अधिकार होगा।
दोनों देशों ने जारी किया संयुक्त बयान
व्हाइट हाउस की तरफ से उक्त आदेश से कुछ घंटे पहले पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बीच 2 फरवरी को हुई वार्ता में भारत और अमेरिका के बीच जिस ट्रेड डील को लेकर सहमति बनी है, उस पर दोनों देशों ने संयुक्त बयान जारी कर दिया है।
किसानों को नहीं अमेरिकी उत्पादों से डरने की जरूरत
इस बयान का लब्बोलुआब यह है कि भारत के पारंपरिक अनाज व दुग्ध उत्पाद करने वाले किसानों को अमेरिकी उत्पादों से डरने की कोई बात नहीं है क्योंकि ना तो गेहूं-चावल, ना ही दूध-पनीर और ना ही केला या अन्य फलों के आयात की मंजूरी दी गई है। हां, पशुचारा, अमेरिकी शराब, सोयाबीन तेल व अन्य फलों का आयात तेजी से बढ़ेगा क्योंकि इनकी राह की बाधाओं को भारत सरकार दूर करेगी।
ट्रंप ने की टैरिफ हटाने की घोषणा
इसके साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने की वजह से भारत पर 25 फीसद के अतिरिक्त शुल्क को हटाने की घोषणा की है। उन्होंने यह दावा भी किया है कि भारत ने प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर रूस से पेट्रोलियम उत्पाद नहीं खरीदने का वादा किया है। वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि भारतीय निर्यातकों के लिए दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के दरवाजे खुलेंगे।
घटेंगी इन चीजों की कीमतें
बयान से साफ है कि भारत में अमेरिका से आने वाले मशीनरी, इलेक्ट्रोनिक्स, फल, ड्राई फ्रूट्स, सोयाबीन तेल, शराब आदि की कीमतें घटेंगी क्योंकि इन पर अब कोई आयात शुल्क नहीं लगेगा। भारत के जिन उद्योगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा उसमें आटोमोबाइल, विमानन पुर्जे, जेनेरिक दवाइयां और रत्न व आभूषण है।
टेक्सटाइल, चमड़ा, जूता, रबर, रसायन, घरेलू सामान के आयात पर अमेरिका में 18 फीसद का टैक्स लगाया जाएगा जो जुलाई, 2025 से पहले लगाये गये शुल्क की दर से ज्यादा है। लेकिन यह दर एशिया में भारत के अन्य प्रतिस्पर्द्धी देशों जैसे विएनताम, चीन, बांग्लादेश आदि से ज्यादा है, तो यहां भी भारतीय निर्यातकों को फायदा मिलने की संभावना है।
अंतरिम समझौते में क्या कहा गया?
अंतरिम समझौते में कहा गया है, “अमेरिका कई अहम भारतीय उत्पादों जैसे जेनेरिक दवाइयां, हीरे-जवाहरात और विमान के पुर्जे पर यह अतिरिक्त शुल्क हटा देगा। अमेरिका भारत से आने वाले कुछ विमान और विमान पुर्जों पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े शुल्क भी हटाएगा। इसके बदले भारत को आटोमोबाइल पुर्जों के लिए अमेरिका में विशेष रियायती कोटा मिलेगा।”
पीयूष गोयल ने क्या कहा?
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व में भारत ने अमेरिका के साथ यह ढांचा तैयार किया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को करीब 30 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। खासतौर पर एमएसएमई, किसान, मछुआरे, महिलाएं और युवा इससे लाभान्वित होंगे। निर्यात में बढ़ोतरी से लाखों नए रोजगार अवसर पैदा होने की उम्मीद है।” भारत को अमेरिकी कानून के तहत सेक्शन 232 में भी राहत मिलेगी।
पशु चारे के लिए खुले दरवाजे
हालांकि भारत ने पशु चारे के आयात को खोलने का फैसला किया है। अमेरिका में पशु चारे की भरपूर उपलब्धता है, जबकि भारत में इसकी कमी बनी रहती है। इससे डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को राहत मिलने और लागत घटने की उम्मीद है। इथेनोल बनाने के बाद बचा हुआ अनाज (पशु आहार के लिए) और लाल ज्वार का आयात खास तौर पर महत्वपूर्ण है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में बताया गया है कि भारत में चारे की कमी पशुपालन क्षेत्र की सबसे बड़ी बाधा है। कई अन्य एजेंसियों की रिपोर्टें बताती हैं कि भारत में पशु धन की संख्या बढ़ रही है जिससे चारा की कमी और बढ़ सकती है। कई सर्वे में 75 फीसदी पशुपालक परिवार चारे की कमी का सामना करने की बात सामने आई है।
अमेरिका से भारत होने वाला आयात बढ़ेगा
बहरहाल, भारत और अमेरिका आर्थिक सुरक्षा, सप्लाई चेन की मजबूती और तकनीकी सहयोग को भी गहरा करेंगे, खासतौर पर तीसरे देशों की अनुचित व्यापार नीतियों से निपटने के लिए। इसके साथ ही भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, तकनीकी सामान और कोकिंग कोल खरीदने को तैयार हुआ है।
इसका मतलब यह हुआ कि अमेरिका से भारत होने वाला आयात दो दोगुना से भी ज्यादा बढ़ जाएगा। दोनों देश टेक्नोलॉजी कारोबार को नई ऊंचाई देने पर भी सहमत हुए हैं। खासकर डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाले जीपीयू और अन्य उन्नत तकनीकी उत्पादों में व्यापार और सहयोग बढ़ाया जाएगा।
कार्यकारी आदेश जारी
संयुक्त बयान के कुछ देर बाद अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से एक कार्यकारी आदेश जारी किया गया जो 7 फरवरी 2026 को प्रभावी हो रहा है। इसमें अमेरिका में भारत से आयात होने वाले सभी सामानों पर पहले लगाया गया अतिरिक्त 25 फीसद की अतिरिक्त शुल्क को अब पूरी तरह हटा दिया गया है।
उक्त शुल्क लगाने का सरकारी आदेश अगस्त, 2025 में जारी किया गया था। इसमें साफ किया गया है कि अब सिर्फ सामान्य टैरिफ या समझौते के तहत कम दर लागू होगी, पहले की तरह 50 फीसद की शुल्क नहीं। यदि भारत फिर से रूस से तेल खरीदना शुरू करता है, तो अमेरिका इसे दोबारा लगाने पर विचार कर सकता है, लेकिन फिलहाल यह हट चुका है।





