अब UP स्वास्थ्य विभाग ने अवैध अस्पतालों पर उठाया बड़ा कदम, लगेगा परमानेंट ताला

अलीगढ़: पिछले कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश के अस्पताल कई विवादों में घिरे हैं। लगातार वहां के अस्पतालों से मरीजों की लापरवाही के चलते मौत की ख़बरें आती रही। अब UP स्वास्थ्य विभाग अवैध रूप से संचालित निजी अस्पतालों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। शासन की सख्ती के बाद स्वास्थ्य विभाग ऐसे अस्पतालों को चिह्नित कर बंद कराने के लिए जल्द अभियान शुरू करेगा।अब UP स्वास्थ्य विभाग ने अवैध अस्पतालों पर उठाया बड़ा कदम, लगेगा परमानेंट ताला

आंकड़ों के अनुसार पूरे जिले में करीब 400 निजी अस्पतालों का स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण है। सूत्रों की मानें तो इनमें से 50 फीसद अस्पतालों में क्वालीफाइड चिकित्सक तक नहीं हैं। एमबीबीएस चिकित्सक के नाम पर आयुष चिकित्सक इनका संचालन कर रहे हैं। इनमें ऐसे अस्पताल भी हैं, जिनमें संचालक का चिकित्सीय पेशे से कोई लेना-देना नहीं। केवल एमबीबीएस चिकित्सकों के दस्तावेज लगाकर पंजीकरण करा लिया गया। हैरत की बात ये है कि मानकों को दरकिनार कर स्वास्थ्य विभाग ऐसे अस्पतालों का पंजीकरण कर रहा है। शहर से लेकर देहात तक ऐसे भी तमाम अस्पताल सालों से संचालित हैं, जिनका पंजीकरण तक नहीं है। ऐसे अस्पतालों का अधिकृत ब्योरा आज तक विभाग के पास नहीं है। बताया जाता है कि ऐसे अस्पताल विभागीय संरक्षण से ही चल रहे हैं।

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नहीं होती कार्रवाई

अवैध अस्पतालों के खिलाफ आए दिन शिकायतें होती हैं, मगर उन पर कोई गौर नहीं किया जाता। कई बार जनप्रतिनिधियों के दबाव में ही एक-दो क्लीनिक व अस्पतालों को सीज किया गया। अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई न होने के पीछे बड़ा खेल बताया जा रहा है।

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क्या बोले सीएमओ डॉ. एमएल अग्रवाल?

अवैध अस्पतालों को लेकर शासन की सख्ती के बाद स्वास्थ्य विभाग की नींद टूट गई है। एसीएमओ के नेतृत्व में टीम गठित हो रही है, जो छापेमारी करेगी। सोमवार से छापेमारी अभियान शुरू हो जाएगा। बिना पंजीकरण के चल रहे अस्पतालों के संचालकों को झोलाछाप की श्रेणी में रखा जाएगा। बिना पंजीकरण के अस्पताल नहीं चलने दिया जाएगा।

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